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स्वच्छतर जीवाश्म उर्जा कार्यबल कार्ययोजना (अंग्रेजी में) - पीडीएफ फॉर्मैट
| CFE-06-01 | कार्बन डाइऑक्साइड अभिग्रहण एवं भंडारण कार्यक्रम |
| CFE-06-02 | एपीपी देशों के लिए अतिचूर्णित कोयले-कार्बन के अभिग्रहण व भंडारण (यूएससी पीसी/ सीसीएस) से सम्बद्ध कार्यशाला एवं अभिकल्पित गाइड - (पूर्ण) |
| CFE-06-03 | अतिस्वच्छ कोयला योजना |
| CFE-06-04 | ऑक्सी-ईंधन दहन कार्यक्रम एवं कार्य-समूह |
| CFE-06-05 | कैलाइड-ए ऑक्सी-ईंधन निरूपण योजना* |
| CFE-06-06 | कोयला संचालित विद्युत केंद्रों के उत्सर्जन के लिए दहन पश्चात अभिग्रहण प्रौद्योगिकी का मूल्यांकन* |
| CFE-06-07 | एपीपी देशों के कोयले के लिए अभिकल्पित सूचना और कार्बन अभिग्रहण व भंडारण कार्यशाला के साथ समेकित गैसीकरण - (पूर्ण) |
| CFE-06-08 | एशिया-प्रशांत गैस बाजार का विकास - (पूर्ण) |
| CFE-06-09 | प्राकृतिक गैस के उत्पादन, संसाधन और ढुलाई में उत्सर्जन का मूल्यांकन एवं न्यूनीकरण |
| CFE-06-10 | एलएनजी जनजागरण अभियान पर सूचनाओं का आदान-प्रदान - (पूर्ण) |
| CFE-06-11 | एशिया-प्रशांत गैस हाइड्रेट सहयोग |
| CFE-06-12 | एपीपी केलिए न्यूनतम उत्सर्जन वाली प्रौद्योगिकियों के फैलाव की कीमत व बाधाएं |
| CFE-06-13 | अधिक कार्बन डाइऑक्साइड वाली कोयला तल मीथेन (सीएसआईआरओ-जेसीओएअल-ईसीबीएम) |
| CFE-07-14 | कोयला गैसीकरण प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड के दहन पूर्व अभिग्रहण के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी का विकास (आईजीसीसी) |
| CFE-07-15 | न्यूनतम उत्सर्जन वाली आईजीसीसी प्रणाली हेतु कोयला गैसीकरण कार्य का मूल्यांकन |
| CFE-07-16 | स्वच्छतम जीवाश्म उर्जा पर सहयोगी शोध एवं विकास (आरऐंडडी) |
| CFE-09-17 | सुरक्षित और कारगर कार्बन अभिग्रहण और भंडारण ले लिए दिशा निर्देशः नियामक क्षमता विकास |
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यह परियोजना साझेदार देशों द्वारा विचार के लिए ऐसे अनेक कार्यप्रस्ताव पेश करेगी जिनसे कार्बन अभिग्रहण और भण्डारण तकनीकों के बारे में ज्ञान और समझ बढे। विभिन्न साझेदार देशों में विकास और तकनीकी उन्नति के स्तर अलग अलग होने तथा प्राकृतिक संसाधन विविधताओं के कारण साझेदार देश अलग अलग विकल्प और प्राथमिकताएं अपना सकते हैं। इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य है ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने में कार्बन अभिग्रहण और भण्डारण की भूमिका के बारे में ज्ञान का विस्तार करना। ऑस्ट्रेलिया और चीन इस परियोजना के भागीदार देश हैं।
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यह परियोजना एक कार्यशाला की योजना बनाकर उसका आयोजन करेगी, उपभोक्ता आधारित खाका और दिशा-निर्देश विकसित करेगी और अत्यंत चूर्णित कोयला (पीसी) ऊर्जा उत्पादन के लिए लगभग शून्य प्रदूषण उत्सर्जन और दहन के बाद कार्बन डाई ऑक्साइड संग्रहण और भंडारण तकनीकों के साथ, जो कि साझेदार देशों में लागू होता है, सूचनाएं स्थानांतरित करेंगी। कोलफ्लीट फॉर टुमॉरो (आर) इस कार्यशाला में शिरकत करेगी, जो 50 अंतरराष्ट्रीय संगठनों का समूह है और जिसमे साझेदार देश भी शामिल हैं। इस कार्यशाला का आयोजन अमेरिका करेगा। यह अनुमान लगाया जाता है कि डिजाइन से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय सूचनाओं और दिशा-निर्देशों द्वारा, सीखे गए सबक और तकनीक मुहैया कराकर इस परियोजना का प्रसार साझेदार देशों में किया जाएगा। इसके अतिरिक्त साझेदार देशों का आदान-प्रदान, कम उत्सर्जन और कार्बन डाई ऑक्साइड संग्रहण विकल्प और डिजाइन से जुड़ी सूचनाएं कोयले के बारे में सोच को व्यापक करेगा, जो अत्यंत चूर्णित कोयला उत्पादन में इस्तेमाल होता है। ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया और अमेरिका इस परियोजना के भागीदार देश हैं।
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यह परियोजना प्रोटोटाइप 6-10 मेगावाट गैस टरबाइन में सीधे ज्वलन के लिए अत्यंत स्वज्छ कोयला ईंधन के प्रदर्शन का लक्ष्य रखती है, जिसे साझेदार देशों में व्यावसायिक इकाइयों की स्थापना की संभावना के प्रस्तावित विकास के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। यह साझेदार देशों को यूसीसी प्रक्रिया मुहैया कराएगा, जिसमें दूसरे कोयला चालित विकल्पों की तुलना में अधिक क्षमता होगी और जो ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को कम करेगा। यह परियोजना दहन/क्षरण जांच के नतीजों के बारे में साझेदार देशों को सूचनाओं का आदान प्रदान करने के योग्य बनाएगी और ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के समाधान के लिए यूसीसी तकनीक को रणनीतिक तरीके से जोड़ेगा। ऑस्ट्रेलिया, चीन और जापान इस परियोजना के भागीदार देश हैं।
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Oxyfuel Working Group website
Download Update Presentation Delivered at March 2009 Oxy-fuel Workshop
कार्य बल ने जिन ऑक्सी ईंधन दहन प्रदर्शन परियोजनाओं का समर्थन किया है, यह परियोजना उन्हें सहारा देने और मूल्य वर्धन के लिए अस्थायी तौर पर एक कार्य समूह का गठन करेगी। विकास कार्यों को समर्थन देने, इसका प्रदर्शन करने और वर्ष 2015 तक ऑक्सी ईंधन दहन को व्यावसायिक तौर पर लागू करने के लिए कार्य समूह एक कार्यक्रम विकसित करेगा। ऑक्सी दहन जीवाश्म ईंधन ऊर्जा इकाइयों से कार्बन डाई ऑक्साइड संग्रहण और भंडारण करने की एक बेहतर तकनीक है। कार्य समूह का गठन मनोनयन प्रक्रिया के तहत होगा, जिसमें सभी भागीदार देशों के प्रतिनिधि होंगे। जोखिम उठाने वालों और साझेदार देशों को एक मंच मुहैया कराने वाले कार्य समूह में एक ऐसी बाजार रणनीति विकसित करने की क्षमता होगी, जो कम खर्च में ऑक्सी ईंधन दहन जैसी स्वच्छतम ऊर्जा मुहैया करा सकेगी। ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया और अमेरिका इस परियोजना के साझेदार होंगे।
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यह परियोजना दुनिया में पहली बार सालाना 30 मेगावाट विद्युत क्षमता की ऑक्सी ईंधन चूर्णित कोयला तकनीक और 30,000 टन कार्बन डाई ऑक्साइड के संग्रहण और भंडारण का पूर्ण समेकित प्रदर्शन मुहैया कराएगी। इस परियोजना में चूर्णित कोयले का ऑक्सी ईंधन दहन, ऑक्सी ईंधन दहन, कार्बन डाई ऑक्साइड प्रसंस्करण और गलाना और कार्बन डाई ऑक्साइड का स्थानांतरण एवं भूगर्भीय भंडारण की पूर्ण और समेकित प्रक्रियाओं के प्रदर्शन का व्यापक लक्ष्य है। ऑक्सी ईंधन तकनीक के सफल प्रदर्शन से जो बिजली पैदा होगी, उसमें उत्सर्जन का स्तर शून्य होगा और इसका पर्यावरण पर भी प्रभाव नगण्य होगा। ऑस्ट्रेलिया और जापान इस परियोजना के भागीदार देश हैं।
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यह परियोजना कोयला चालित विद्युत इकाइयों के लिए दहन के बाद कार्बन डाई ऑक्साइड संग्रहण की तकनीक मुहैया कराएगी। डिजाइन के लिए सॉल्वेंट का प्रारंभिक प्रयोगशाला मूल्यांकन साझेदार देशों की विद्युत इकाइयों के लिए उनके प्रतिनिधि गर्म गैसों के आधार पर किया जाएगा। आंकड़ा, सॉल्वेंट प्रदर्शन जांच और प्रत्येक इकाई में औसतन एक बार सालाना व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के लिए 2-3 साझेदार विद्युत इकाइयों में एक मौजूदा केंद्रीय चलायमान इकाई स्थापित की जाएगी। उसके बाद बढ़े हुए पैमाने पर प्रदर्शन की योजना तैयार की जाएगी। ऑस्ट्रेलिया और चीन इस परियोजना के साझेदार देश हैं।.
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इस परियोजना में साझेदार देशों की जरूरत के लिए समेकित गैसीकरण चक्र (आईजीसीसी) और कार्बन डाई ऑक्साइड संग्रहण व भंडारण तकनीक (सीसीएस) के उपभोक्ता डिजाइनर आधारित दिशा-निर्देश की तैयारी का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्यशाला, जिसकी बैठक सितंबर, 2006 में टोक्यो, जापान में हुई, के प्रबंधन का प्रायोजन जापान और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। विशेषज्ञ समूह की बैठक में 40 से ज्यादा सदस्यों ने भाग लिया, जबकि कार्यशाला में सभी सदस्य देशों के 300 से अधिक लोग शामिल थे। कार्यशाला ने साझेदारों को उनके कोयले और आईजीसीसी/सीसीएस के एकीकरण से संबंधित विशिष्ट सूचनाओं और अंतर के बारे में जानकारियां मुहैया कराईं। इस परियोजना से प्राप्त निष्कर्षों का इस्तेमाल आदान-प्रदान का रास्ता ढूंढने, आईजीसीसी/सीसीएस के लिए विचार किए जाने वाले कोयले की श्रेणी को व्यापक रूप देने और सदस्य देशों के कोयले के डिजाइन के लिए सूचनाएं देना है। ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया और अमेरिका इसके भागीदार देश हैं।
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Download Executive Summary and Key Findings
Download Asia-Pacific Gas Market Growth Report
अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की इस परियोजना का लक्ष्य साझेदार अर्थव्यवस्थाओं में विस्तृत गैस बाजार की प्राप्ति है। इसका लक्ष्य द्रवीभूत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) कारोबार और बाजार तक पहुंच के लिए एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) के सर्वोत्तम प्रयोगों को बढ़ावा देना है। इसके तहत साझेदार देशों के सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के प्रतिनिधि आपूर्ति किए गए गैस में ऊर्जा उपभोग का हिस्सा बढ़ाने के उपायों पर विचार करेंगे। यह अंतत: ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय स्तर पर वायु प्रदूषण में कमी और कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी को बढ़ावा देगा, जिससे आर्थिक वृद्धि को बरकरार रखा जा सकेगा और गरीबी घटेगी। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका इस परियोजना के भागीदार हैं।
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द्रवीभूत प्राकृतिक गैस सुविधा और गैस आधार संरचना से मीथेन, कार्बन डाई ऑक्साइड और दूसरे ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का हिसाब लगाने के लिए ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका इस परियोजना के तहत एक सतत और विस्तृत तरीका विकसित करेंगे। इस परियोजना का उपयोग बाजार साझेदारी में मीथेन, गैसस्टार और दूसरे मौजूदा उपायों के साथ किया जाएगा। इसका लक्ष्य साझेदार देशों में मौजूदा स्तर पर मीथेन रिसाव में 30 प्रतिशत तक की कमी लाना है। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका इस परियोजना के भागीदार हैं।
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अमेरिका के नेतृत्व में ऑस्ट्रेलिया, चीन और एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग (एपीईसी) ऊर्जा कार्ययोजना के तहत यह परियोजना द्रवीभूत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) से जुड़े जन अभियान के लिए दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला आयोजित कर रही है। इस कार्यशाला का लक्ष्य नए द्रवीभूत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) शिपिंग और रिसीविंग टर्मिनल मामले में जन-विरोध को कम करना है। ऑस्ट्रेलिया, चीन और संयुक्त राज्य इस परियोजना के भागीदार देश हैं।
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गैस हाइड्रेट्स को एक स्वच्छ ऊर्जा स्रोत के रूप में विकसित करने के लिए कई साझेदार देश महत्वपूर्ण शोध और विकास (आरऐंडडी) कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इस परियोजना का लक्ष्य जहां नीति निर्धारकों और गवेषकों के साथ इन सूचनाओं का आदान-प्रदान कर एक व्यवस्था मुहैया कराना है, वहीं साझेदार देशों को साझे खर्च पर संयुक्त परियोजनाएं आयोजित कराने के योग्य बनाना है, जिससे कि निकट भविष्य में गैस हाइड्रेट्स को एक विश्वसनीय व्यावसायिक ऊर्जा स्रोत के तौर पर विकसित किया जा सके। मौजूदा शोध और विकास (आरऐंडडी) कार्यक्रमों के साथ यह परियोजना साझेदार देशों को यह आश्वस्त करने में मदद करेगी कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में ऊर्जा की बढ़ती मांग से निपटा जा सकेगा। ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान और अमेरिका इस परियोजना के भागीदार देश हैं।
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इस परियोजना का लक्ष्य कम उत्सर्जन तकनीकों (एलईटी) की परिपक्वता के व्यापक डिजाइनों का मौजूदा स्तर निर्धारित करना और मौजदा समय एवं साझेदार देशों के ऊर्जा बाजार के समय के बीच उनका संबंधित लागत अनुपात निकालना है। यह परियोजना एक अध्ययन रिपोर्ट पेश करेगी, जो एकीकृत तरीके से स्वच्छ विकास और पर्यावरण लक्ष्य के प्रभाव के परिप्रेक्ष्य में कम उत्सर्जन तकनीकों (एलईटी) की लागत क्षमता की पहचान करेगी। विभिन्न ऊर्जा तकनीक लागू करने के क्षेत्र में लागत और दूसरे बाधकों की पहचान साझेदार देशों के लक्ष्य की दिशा में पहला महत्वपूर्ण कदम है। ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका इस परियोजना के भागीदार देश हैं।
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यह परियोजना कार्बन डाई ऑक्साइड के अलगाव को प्रमाणित करेगी और उस कोल बेड मीथेन (ईसीबीएम) तकनीक की क्षमता बढ़ाएगी, जिसे जापान में जापानी और ऑस्ट्रेलियाई कोयले और उसके आंकड़ों का इस्तेमाल कर विकसित किया गया है। ऑस्ट्रेलिया और जापान ईसीबीएम तकनीक से संबंधित अपने पुराने शोध और अनुसंधान तकनीक के आधार पर इस परियोजना के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेंगे। ऑस्ट्रेलिया, चीन और जापान इस परियोजना के भागीदार हैं।
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कोयला चालित विद्युत उत्पादन में उत्सर्जन को गैसीकरण प्रक्रिया (आईजीसीसी) और भू-अधिकार के सम्मिलित इस्तेमाल से नाटकीय तरीके से कम किया जा सकता है। हालांकि इन प्रक्रियाओं की क्षमता एडवांस्ड स्थिरीकरण प्रक्रिया तकनीक के साथ-साथ मुनासिब और विश्वसनीय संग्रहण तकनीकों पर निर्भर करती है। यह परियोजना इन तकनीकों को एक साथ मिलाकर कार्बन डाई ऑक्साइड संग्रहण की एक ऐसी तकनीक के रूप में विकसित करेगी, जिससे कार्बन संग्रहण और भंडारण अधिक सस्ता हो जाएगा। ऑस्ट्रेलिया और भारत इस परियोजना के भागीदार देश हैं।
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ऑस्ट्रेलिया और चीन ने एशिया-प्रशांत साझेदारी का इस्तेमाल कोयला गैसीकरण के क्षेत्र में सामूहिक संपर्क स्थापित करने में किया है। इस परियोजना द्वारा उनका काम जारी रहेगा, जो ऑस्ट्रेलिया और चीन में पाए जाने वाले कोयले की किस्मों में कोयला गैसीकरण और धातु रेशों के बहाव व्यवहारों का आंकड़ा इकट्ठा करेगा। इसका नतीजा आईजीसीसी आधारित विद्युत उत्पादन प्रणाली में बढ़ी हुई क्षमता और बेहतर पर्यावरणीय प्रदर्शन के रूप में सामने आएगा।
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कोरिया और संयुक्त राज्य जीवाश्म ईंधन से संबंधित शोध और विकास (आरऐंडडी) के क्षेत्र में सहयोग करने पर सहमत हो गए हैं। इसके तहत सूचनाओं का आदान-प्रदान, ज्ञान, अनुभव, सर्वोत्तम प्रयोग, संयुक्त शोध और विकास परियोजनाएं, सामूहिक प्रकाशन; बैठकें, कार्यशालाएं, लघु सम्मेलन; व्यक्तिगत विचार-विमर्श, मानवीय और संस्थागत क्षमता निर्माण आदि प्रयास शामिल हैं। उच्च क्षमता वाली विद्युत प्रणालियां, पर्यावरणीय नियंत्रण की उन्नत व्यवस्थाएं, और कोल बेड मीथेन व कोल माइन मीथेन की प्राप्ति आकलन तकनीक आदि क्षेत्रों में यह सहयोग होगा। कोरिया और अमेरिका इस परियोजना के भागीदार देश हैं।
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चीन और अमेरिका में कार्बन अभिग्रहण और भंडारण (सीसीएस) के तकनीकी और भूवैज्ञानिक, दोनों पहलुओं पर पहले ही काफ़ी प्रयास हो रहे हैं, लेकिन एक नियामक ढांचे का विकास चुनौतीपूर्ण रहा है । इस परियोजना का उद्देश्य है क्षमता-निर्माण के ज़रिए सीसीएस तकनीकों के प्रदर्शन को गति प्रदान करना । सुरक्षित और कारगर सीसीएस के लिए उपयुक्त दिशानिर्देशों और सर्वोत्तम विधियों के विकास और व्याख्या के ज़रिए यह काम किया जाएगा, और साथ ही सम्पूर्ण प्रक्रिया के दौरान तकनीकी विशेषज्ञों तथा प्रमुख नीति निर्माताओं को इसमें सम्मिलित रखा जाएगा । इस परियोजना में साझेदार हैं चीन और अमेरिका ।