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सीमेंट कार्य बल कार्ययोजना (अंग्रेजी में) - पीडीएफ फॉर्मैट
| CMT-06-01 | स्थिति रिपोर्ट |
| CMT-06-02 | मानकीकरण (बेंचमार्क प्रगति) |
| CMT-06-03 | वैधानिक/विनियामक मुद्दे |
| CMT-06-04 | सतत जीवनक्षम शहरों की रणनीति के रूप में कंक्रीट भवन निर्माण के जीवन चक्र का मूल्यांकन |
| CMT-06-05 | विशिष्टता केंद्र* |
| CMT-06-06 | सीमेंट भट्ठा सह-उत्पादन |
| CMT-06-07 | खतरनाक कचरा- सीमेंट भट्ठों में सह-संसाधन एवं प्रबंधन के श्रेष्ठ प्रयोग* |
| CMT-07-08 | सीमेंट उत्पादन के लिए उच्च शक्ति वाला जैव ईंधन |
| CMT-07-09 | कार्बन डाइऑक्साइड ह्रास के रूप में सीमेंट कंकरीट का प्रभाव |
| CMT-07-10 | कार्य निरूपण* |
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सीमेंट कार्य बल की पहली प्राथमिकता साझेदार देशों के बीच बुनियादी आंकड़ों की कमी दूर करना है। यह विकास और कार्य बल के भविष्य के काम की सफलता के लिए महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए ये आंकड़े हैं, कार्बन डाई ऑक्साइड और वायु प्रदूषण की उत्सर्जन तीव्रता, ऊर्जा का उपयोग और तीव्रता और वैकल्पिक ईंधनों व कच्चे मालों का इस्तेमाल। जापान ने आंकड़ा संग्रहण के इस काम को न सिर्फ संगठित स्वरूप दिया है, बल्कि उसने इसकी फंडिंग भी की है। इस परियोजना के तहत मिली सूचनाएं साझेदार देशों के बीच उनके मौजूदा ऊर्जा उपभोग स्तर, उत्सर्जन और प्रयोगों के संदर्भ में बेहतर समझ विकसित करने में महत्वपूर्ण योगदान करेंगी। इसके अलावा संग्रहित किए जाने वाले आंकड़े कार्य बल के मानकीकरण विकास और सर्वोत्तम प्रयोगों का आधार भी बनेंगे। जापान इस परियोजना का भागीदार देश है।
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कार्य बल साझेदार स्थिति रिपोर्ट परियोजना (देखें परियोजना 1.-स्थिति रिपोर्ट) के आधार पर उत्सर्जन में कमी की संभावना के मूल्यांकन के लिए मानक विकसित करेंगे। साझेदार मानकीकरण की परिभाषा तय करने के साथ कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन, ऊर्जा कुशलता, पुनरुत्पादन और वायु प्रदूषण का पैमाना जैसे मुख्य संकेतकों का चुनाव करेंगे। इसके अतिरिक्त सीमेंट कार्य बल उत्सर्जन में कमी की संभावना और मानकीकरण का हिसाब लगाएंगे, उत्सर्जन कमी में संभावित बाधकों की पहचान करेंगे और उत्सर्जन में कमी का लक्ष्य पूरा करने के संबंध में साझेदार देशों की सरकारों को सिफारिशें भेजेंगे। जापान और अमेरिका इस परियोजना के भागीदार देश हैं।
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साझेदार देशों ने स्वच्छतम व और भी बेहतर सीमेंट उत्पादन में बाधक बने कुछ कानूनी और विनियंत्रक मुद्दों की पहचान कर ली है। सीमेंट कार्य बल इन कानूनी और विनियंत्रक मुद्दों का तुलनात्मक अध्ययन करेगा, सीमेंट उत्पादन में कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन कम करने के लिए लाभकारी कदम उठाने की घोषणा करेगा और स्वच्छतम उत्पादन तकनीकों का इस्तेमाल करेगा। इसके अतिरिक्त साझेदार देश कानूनी एवं विनियंत्रक बाधक की पहचान करेंगे और पर्यावरण प्रदूषण के असर को कम करने के लिए कंक्रीट का इस्तेमाल बढ़ाने के लिए लाभकारी कदम उठाएंगे। अमेरिका इसकी फंडिंग के साथ-साथ इसके संगठन का भी काम करेगा। इस परियोजना का दोहरा उद्देश्य है: एक साझेदार देश स्वच्छतम और बेहतर सीमेंट के उत्पादन के लिए इसके रास्ते के कानूनी एवं विनियंत्रक बाधकों को दूर या कम करने की कोशिश करते हुए पर्यावरण के दुष्प्रभाव को बेअसर करने के लिए कंक्रीट का इस्तेमाल करेंगे, और दूसरा, लाभ को प्रोत्साहित करने के लिए आक्रामक तरीके से काम करेंगे। अमेरिका इस परियोजना का साझेदार है।
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साझेदारों की सीमेंट उत्पादन प्रक्रिया को बढ़ावा देने के लिए कार्य बल कंक्रीट के इस्तेमाल को प्रोत्साहित करने का तरीका ढूंढेंगे, ताकि पर्यावरण परिवर्तन के दुष्प्रभाव को कम किया जा सके। कार्य बल कंक्रीट के प्रयोग का मूल्यांकन करेंगे, कंक्रीट के इस्तेमाल से ऊर्जा क्षमता के जीवन चक्र के बारे में सामूहिक रूप से शोध करेंगे और आगे के उपायों की पहचान करेंगे, ताकि सरकारें कंक्रीट उत्पादों का इस्तेमाल करते हुए लगातार जारी विकास कार्यों को प्रोत्साहित कर सकें। इस कोशिश में ऊर्जा कुशल निर्माणों का मूल्यांकन, शहरी इलाकों में ताप को कम करना, वाहन ईंधन क्षमता, और निर्माणों का स्थायित्व आदि शामिल हैं। अमेरिका इस परियोजना में फंडिंग करने के अलावा संगठन के काम भी देखेगा। साझेदार देश इस संदर्भ में उपलब्ध जानकारियों और कार्यक्रमों का संक्षिप्तीकरण करेंगे, ताकि कंक्रीट के इस्तेमाल का मूल्यांकन करते हुए संभावनाशील शोध परियोजनाओं की पहचान की जाए और आगे के कदमों की संस्तुति की जाए, जिससे कि सरकारें कंक्रीट उत्पादों का इस्तेमाल करते हुए लगातार जारी विकास को प्रोत्साहित कर सकें। अमेरिका इस परियोजना का प्रतिभागी साझेदार है।
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साझेदार देश प्रस्तावित विशिष्टता केंद्र का इस्तेमाल सर्वोत्तम प्रयोगों की जानकारियों के आदान प्रदान, उभरती तकनीकों के बारे में शोध करने, साझेदार सरकारों और सीमेंट उत्पादन संगठनों व बड़े सीमेंट उत्पादकों में सुधरे हुए और पर्यावरणीय प्रदर्शनों को प्रोत्साहित करने के लिए करेंगे। यह केंद्र छात्रवृत्ति और व्याख्यान/शोध के अवसर मुहैया कराएगा, जिसके तहत साझेदार देशों के आवेदक एशिया-प्रशांत साझेदारी से जुड़े प्रासंगिक परियोजना पर बीजिंग के चायना बिल्डिंग मैटेरियल्स एकेडमी में शोध टीम के साथ एक साल काम कर सकेंगे। यह केंद्र साझेदार देशों में प्रशिक्षित कामगारों के आदान-प्रदान में मदद करेगा, ताकि ऊर्जा क्षमता के क्षेत्र में कंपनियों के बीच तकनीकी विशेषज्ञता के फैलाव को बढ़ावा मिले, ग्रीन हाउस गैस में कमी आए और सीमेंट उत्पादन के लिए वैकल्पिक ईंधनों और कच्चे माल का इस्तेमाल हो। विशिष्टता केंद्र चीन में स्थित होगा। ऑस्ट्रेलिया, चीन और जापान इस परियोजना में प्रतिभागी साझेदार हैं।
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सीमेंट भट्ठा विद्युत सह-उत्पादन प्रदर्शनी इकाई से जुड़ी यह परियोजना साझेदार देशों में ऊर्जा कुशल एवं स्वच्छतम उत्पादन नुस्खों के प्रदर्शन और इन्हें लागू करने में मदद करेगी। प्रदर्शनी इकाई सीमेंट भट्ठी के अवशिष्ट ताप से विद्युत उत्पादन करने एवं इसके आर्थिक लाभ और ऊर्जा क्षमता का दस्तावेज तैयार करेगी। इस परियोजना में सीमेंट भट्ठा परिचालन और सह-उत्पादन जैसी दो स्थापित तकनीकों को सीमेंट उत्पादन ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन के संवेग को कम करने, सीमेंट भट्ठे की ऊर्जा उपयोग क्षमता बढ़ाने, भट्ठे में ऊर्जा की खपत कम करने और ऊर्जा उत्पादन करने में एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा। इसके अतिरिक्त यह परियोजना सीमेंट भट्ठा अवशिष्ट ताप के इस्तेमाल से सह-उत्पादन सुविधाओं को पिछले स्तर पर ले जाने की तकनीकी और इंजीनियरिंग चुनौतियों का प्रदर्शन करेगी, एक खास सीमेंट इकाई में सह-उत्पादन सुविधाएं स्थापित करने से प्राप्त ऊर्जा क्षमता लाभ का विवरण देगी, सह-उत्पादन तकनीक से जुड़ी साझेदार देशों की विशेषज्ञता को विस्तार देगी और साझेदार देशों में सह-उत्पादन तकनीक लागू करवाने में सहायता करेगी। यह इकाई ऑस्ट्रेलिया में स्थापित की जाएगी। ऑस्ट्रेलिया और चीन इस परियोजना के भागीदार होंगे।
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यह एक बहुद्देश्यीय परियोजना है, जिसके तहत सीमेंट भट्ठों को नवीकरण योग्य ऊर्जा की आपूर्ति विश्वसनीय तरीकों और मुनासिब मूल्यों पर करने का लक्ष्य है, जबकि एशिया-प्रशांत साझेदार सदस्य देशों में अवशिष्ट प्रबंधन के लिए साफ और खुद ही नष्ट कर देने वाली तकनीक उपलब्ध कराने का उद्देश्य है। यह परियोजना सीमेंट भट्ठों में अवशिष्ट ठोस धातुओं के उत्पादन के लिए खतरनाक और दूसरे औद्योगिक अवशिष्टों को विश्वसनीय, वैकल्पिक और नवीकरण योग्य ऊर्जा स्रोतों के रूप में प्रोन्नत कर ऐसा करेगी। इस परियोजना से वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल के प्रति सजगता को बढ़ावा मिलेगा, सक्षम तकनीकें लागू की जाएंगी और जीवाश्म ईंधन से उत्सर्जन घटेगा।
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इस परियोजना का लक्ष्य सीमेंट भट्ठी में अवशिष्ट ठोस धातुओं के उत्पादन के लिए बायोमास ईंधन को एक वैकल्पिक और नवीकरण करने लायक ऊर्जा के तौर पर प्रोन्नत करना है। इसके अलावा मौजूदा बायोमास अवशिष्ट पदार्थों को प्रसंस्कृत करने के लिए अब नई तकनीकें उपलब्ध हैं, जो उत्सर्जन से कार्बन डाई ऑक्साइड को अलग कर इसे बंद फोटो-बायो-रिएक्टर प्रणाली में प्रतिक्रिया कराकर कार्बन को उच्च ऊर्जा बायोमास में बदल सकते हैं। इस बायोमास को सीमेंट भट्ठियों में ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है या इसे और प्रसंस्कृत कर कीमती पदार्थों में बदला जा सकता है। यह परियोजना नवीनीकृत ऊर्जा के स्रोत के तौर पर विभिन्न प्रकार के विश्वसनीय बायोमास की संभावनाएं तलाशेगी।
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इस बारे में अभी व्यापक जानकारी नहीं है कि कंक्रीट समय बीतने पर कार्बन डाई ऑक्साइड को सोख लेता है। इस दिशा में आगे अध्ययन के लिए शोध किया जाएगा। यह परियोजना जरूरी शोध के अलावा निर्मित और इस्तेमाल किए गए कंक्रीट से कार्बन डाई ऑक्साइड के सोखने के बारे में एक आकलन मॉडल विकसित करेगी। इसके बाद यह आईपीसीसी को कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन के गणना संलेख में संशोधन का सुझव देगी। ऑस्ट्रेलिया, भारत, कोरिया और अमेरिका इसके भागीदार देश हैं।.
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इस परियोजना के तहत जापान के सीमेंट उद्योग के ऊर्जा बचत, पर्यावरण प्रबंधन और सीमेंट उत्पादन के विशेषज्ञ प्रदर्शन जांचने के लिए चीनी और भारतीय सीमेंट उद्योग का दौरा करेंगे और यह सिफारिश मुहैया कराऐंगे कि कैसे फैक्टरियां अपनी तकनीकों को आधुनिकतम और परिचालन रवैये को सकारात्मक बना सकती हैं। इस परियोजना का लक्ष्य भारत और चीन की सीमेंट फैक्टरियों में स्थानीय शर्तों के अनुरूप लघु और मध्यम से दीर्घ अवधि में ऊर्जा बचत और पर्यावरण प्रबंधन से जुड़े सुझव देना है। ये सिफारिशें जहां साझेदार देशों की सीमेंट फैक्टरियों को बेहतर निर्णय लागू करने को प्रेरित करेंगी, वहीं ये उन ऊर्जा बचत और पर्यावरण प्रबंधन तकनीकों को भी मान्यता देंगी, जिनसे इनकी क्षमता और उत्पादन में सुधार होगा। इस परियोजना का नेतृत्व जापान करेगा, जबकि भारत और चीन भागीदार होंगे।