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भवन एवं उपकरण कार्य बल - पीडीएफ फॉर्मैट
| BATF-06-01 | विद्युत मोटरों के लिए परीक्षण कार्य-विधि का समन्वयन |
| BATF-06-02 | मोटर पद्धतियों के लिए परीक्षण कार्य-विधि का समन्वयन |
| BATF-06-03 | अकुशल प्रकाश व्यवस्था का क्रमबद्ध समापन |
| BATF-06-04 | HVAC के लिए परीक्षण कार्य-विधि का समन्वयन |
| BATF-06-05 | घरेलू रेफ्रिजिरेटरों के लिए परीक्षण कार्य-विधि का समन्वयन |
| BATF-06-06 | इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए परीक्षण कार्य-विधि का समन्वयन |
| BATF-06-07 | स्टैंड-बाई बिजली खपत के प्रति राष्ट्रीय नज़रियों का समन्वयन |
| BATF-06-08 | एपीपी देशों में मंडी रूपान्तरण नीतियाँ: पुस्तिका और मानचित्रण |
| BATF-06-09 | सरकारी खरीद के सर्वोत्तम तरीकों पर कार्यशाला |
| BATF-06-10 | भारत के लिए ऊर्जा कुशलता लेबल लगाने के कार्यक्रम को समर्थन |
| BATF-06-11 | ऊर्जा कुशलता लेबल समन्वयन के लिए चीन-अमेरिका मार्गदर्शी योजना |
| BATF-06-12 | भवन प्रमाणीकरण नीति और प्रबंध पद्धतियों का मूल्यांकन और जहाँ उचित हो उन्हें अपनाने को प्रोत्साहन |
| BATF-06-13 | भवन ऊर्जा लेबलिंग की मार्गदर्शी परियोजनाएं |
| BATF-06-14 | निरंतर संशोधन और सुधार के लिए सूचना आदान प्रदान नेटवर्क की स्थापना |
| BATF-06-15 | एपीपी देशों को हरित भवन दिशानिर्देश तथा सम्बद्ध प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराना - (रद्द) |
| BATF-06-16 | भवन आंकडों और मानकों के बारे में अमेरिकी अनुभवों की जानकारी बाँटना - (रद्द) |
| BATF-06-17 | ओओबीईआर (कार्यालय भवनों का ऊर्जा कुशलता मूल्यांकन) |
| BATF-06-18 | ऊर्जा प्रबंध और मौजूदा इमारतों में कम खर्च ऊर्जा कुशलता के बारे में प्रशिक्षण कार्यशालाएं |
| BATF-06-19 | मौजूदा इमारर्तों में खर्च-रहित या कम-खर्च ऊर्जा कुशलता उपाय लागू करने की मार्गदर्शी योजना |
| BATF-06-20 | पश्च-स्थापन सम्भावना के मूल्याँकन के लिए प्रस्तावित जाँच ढांचा - (रद्द) |
| BATF-06-21 | भारत में मौजूदा इमारतों के चिलर्स का पश्च-स्थापन |
| BATF-06-22 | मौजूदा इमारतों को फिर चालू करने के लिए मार्गदर्शिका विकसित करना |
| BATF-06-23 | ऊर्जा कुशलता सुधार: कम ऊर्जा वाली ऊंची इमारत परियोजना (अंतर्राष्ट्रीय विस्तार सहित) |
| BATF-06-24 | भवन ऊर्जा नियमावलियों का सर्वेक्षण तथा एपीपी देशों में ऊर्जा नियमावली संवर्धन के ज़रिये ऊर्जा खपत घटाने के दृश्य-विधान विकसित करना |
| BATF-06-25 | खिड़की वर्गीकरण कार्यविधियों और/अथवा लेबलों का विकास/समन्वयन |
| BATF-06-26 | उच्च निष्पादन भवनों और सम्बद्ध जानकारी के लिए एपीपी का वेब पोर्टल |
| BATF-06-27 | चीन में ध्वजपोत हरित-भवन* |
| BATF-06-28 | एसबी08 - छठा विश्व जीवनक्षम भवन सम्मलेन - (पूर्ण) |
| BATF-06-29 | एपीपी क्षेत्र में बिजली आदि सप्लाई करने वाली इकाईयों में ऊर्जा कुशलता लागू करने और उसके लिए धन जुटाने की अच्छी विधियां और सीखे गए सबक़ |
| BATF-06-30 | चीन और भारत के लिए तकनीकी समर्थन |
| BATF-06-31 | चतुर मीटर |
| BATF-06-32 | हरित पट्टे |
| BATF-06-33 | व्यापारिक वित्तप्रबंध: उपाय आदान प्रदान - (रद्द) |
| BATF-06-34 | भारत में सार्वजनिक क्षेत्र मंडी मूल्यांकन |
| BATF-06-35 | व्यापारिक वित्तप्रबंध: संयुक्त परियोजनाएं - (रद्द) |
| BATF-07-36 | सघन प्रति-दीप्त बत्तियों (सीएफ एल*) की गुणवत्ता आश्वासन के कार्यक्रम और उनमें सामंजस्य* |
| BATF-07-37 | भारत में ऊर्जा कुशलता मानक और लेबलिंग कार्यक्रम लागू करके जलवायु परिवर्तन में कमी लाना |
| BATF-07-38 | शहरी जलवायु परियोजना - स्वच्छ और कुशल शहरों का निर्माण (मंडी रूपांतरण विषयक संयुक्त परियोजना) |
| BATF-07-39 | ऑस्ट्रेलिया-भारत भवन कुशलता संवर्धन |
| BATF-07-40 | भारत में ऊर्जा प्रबंध कार्यक्रम |
| BATF-07-41 | तिएन्जिन हरित कार्यालय भवन पश्च-स्थापन - (रद्द) |
| BATF-07-42 | भारत में उच्च निष्पादन व्यापारिक भवन |
| BATF-07-43 | भारत में क्षेत्रीय ऊर्जा कुशलता केंद्र |
| BATF-07-44 | ऊर्जा कुशल इमारतों में निष्क्रिय डिजाईन और सौर ऊर्जा टेक्नोलॉजियों के लिए प्रोत्साहक ढांचा |
| BATF-07-45 | भारत में उच्च टेक्नोलॉजी भवन उपक्रम: मार्गदर्शी डेटा केंद्र |
| BATF-07-46 | चीन में भवन ऊर्जा श्रेणी-निर्धारण उपकरण (सीबीईआरटी) |
| BATF-08-47 | ऊर्जा और वातावरण सम्बन्धी सर्वोत्तम विधियों के आदान प्रदान के लिए भारत-अमेरिकी शहर साझेदारी |
| BATF-08-48 | चीन में मौजूदा इमारतों का नवीकरण |
| BATF-08-49 | हरितस्थान टीएम – आईटी / आईटीईएस विशेष आर्थिक क्षेत्र * |
| BATF-09-50 | भवन ऊर्जा निष्पादन प्रमाणीकरण प्रस्ताव |
| BATF-09-51 | उन्नत संचालन से इमारतों में ऊर्जा कुशलता बढ़ाना |
| BATF-09-52 | चीन में इमारत ऊर्जा संहिता लागू करना - स्थानीय साझेदारी से लेकर राष्ट्रीय भवन ऊर्जा दक्षता तक |
| BATF-09-53 | अन्तर्राष्ट्रीय एनज़ीईएच संघ / संवाद* |
| BATF-09-54 | परीक्षण क्रियाविधियों का समन्वयन - ऊर्जा पुनर्प्राप्ति सम्वातक |
| BATF-09-55 | भवन आवरण अवयवों के ऊर्जा निष्पादन लेबलिंग और प्रमाणन विकास के ज़रिये भवन ऊर्जा संहिताओं की भूमिका का संवर्धन |
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इस परियोजना के अर्न्तगत साझा देशों में विद्युत मोटरों के परिक्षण के लिए समन्वित कार्यविधियाँ तैयार करने की दिशा में काम किया जायेगा ताकि सफल मानकों और लेबलिंग कार्यक्रमों के विकास की राह की एक प्रमुख बाधा को दूर किया जा सके. गतिविधियों में एक ऐसा मंच तैयार करना भी शामिल होगा जो उन सरकारी अधिकारियों के बीच वार्तालाप सुगम बना सके जो किसी विशिष्ट परिक्षण विधि और कार्य निष्पादन के लिए जिम्मेदार हों या उसके इस्तेमाल के बारे में अनुभवों और आंकड़ों के आदान प्रदान में रूचि रखते हों. "तकनीकी आदान प्रदान" का एक ऐसा मंच भी निर्मित किया जायेगा जहाँ विशेषज्ञ, भाग लेने वाले हर एपीपी देश में मोटरों के तुलनात्मक परीक्षण अथवा "वृत्त परीक्षण" पर निगाह रख सकें, और परीक्षण की सामान्यतः इस्तेमाल की जाने वाली इन दो विधियों की तुलना कर सकें. साथ ही एपीपी सदस्य देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रो-टेक्नीकल आयोग के कार्यदलों के साथ मिल कर काम करना सुगम बनाया जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मानक विकास प्रक्रिया के परिणाम इन देशों में इस्तेमाल के लिए उपयुक्त हैं. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है साझा देशों में मोटर पद्धतियों के परीक्षण की समन्वित कार्यविधियाँ तैयार करना, ताकि सफल मानकों और लेबलिंग कार्यक्रमों के विकास की प्रमुख बाधाओं को ख़त्म किया जा सके. परियोजना की गतिविधियों में एक ऐसा मंच तैयार करना भी शामिल है जहाँ सरकारें मोटर चालित पद्धतियों की बेहतर कुशलता के विधेयक पारित करने के लाभों और उसके मार्ग की बाधाओं के बारे में जानकारी का आदान प्रदान कर सकें; ऐसा मंच तैयार करना जहाँ फिलहाल मौजूद परीक्षण आंकड़ों की तुलना के लिए तकनीकी आदान प्रदान हो सके; और उत्पादों की प्राथमिकता वाली ऐसी सूची तैयार करना जो ऊर्जा कुशलता निष्पादन आवश्यकताओं का व्यवहारिक तौर पर विषय बन सके. भाग लेने वाले एपीपी देश कामकाजी इकाईयों के बारे में अनुभवों का आदान प्रदान करने और मोटर पद्धतियों के बारे में ऐसे ही प्रयासों में लगे अन्य क्षेत्रीय दलों के साथ काम करने का भी प्रयास करेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
इस परियोजना का उद्देश्य है अकुशल प्रकाश व्यवस्था के क्रमबद्ध समापन के प्रयासों को बढ़ावा देना. व्यापक तौर पर माना जाता है कि जलवायु परिवर्तन से जूझने का यह एक सबसे महत्वपूर्ण लघु-कालिक उपक्रम है. फेज़ आउट 2008 एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय मंच था जहाँ प्रमुख पणधारी इस दिशा में विश्व भर में चल रहे प्रयासों के बारे में मिल बैठ कर सूचना का आदान प्रदान कर सकें. यह सीखे गए सबक़ और अनुभवों को बाँटने का, क्रमबद्ध समापन की चुनौतियों और उद्योग के लिए इसके निहितार्थों पर विचार करने का, तथा यह पहचानने का एक अवसर था कि कुशल प्रकाश व्यवस्था की दिशा में बढ़ने के लिए क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर का सहयोग कैसे लाभकारी हो सकता है. फेज़ आउट 2008 के अर्न्तगत प्रकाश उद्योग, सरकारी नियामक और अंतर्राष्ट्रीय संगठन एक मंच पर एकत्र हुए. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है साझा देशों में इमारतों को गर्म रखने, वायु संचार, और वातानुकूलन (एचवीएसी) के उपकरणों के लिए समन्वित परीक्षण विधियां तैयार करना. ऊर्जा की बढती कीमतों, और वातावरण सम्बन्धी अधिक जागरूकता से प्रेरित हो कर, एचवीएसी उपकरणों के उत्पादनकर्ता यह प्रयास करते रहे हैं कि वे जो उपकरण तैयार करते हैं उन्हें अधिक कार्य-कुशल बनाएं. इस परियोजना का लक्ष्य है उत्पादनकर्ताओं के लिए बहु-परीक्षणों के बोझ और उससे पैदा होने वाले अनुत्साह को कम करके, अधिक ऊर्जा कुशल उत्पादों तथा ऊर्जा बचत की नई टेक्नोलोजिओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंडी का विकास करना. इस परियोजना में मौजूदा परीक्षण विधियों का मूल्यांकन करना और उसके बाद संशोधन करना और/अथवा परीक्षण के नए मानक तैयार करना शामिल है. इस परियोजना में भागीदार देश हैं ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका.
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इस परियोजना का लक्ष्य है साझा देशों में रेफ्रिजिरेटरों के लिए समन्वित परीक्षण विधियां तैयार करना. साझा देश रेफ्रिजिरेटरों के लिए ऐसे नए परीक्षण तरीकों के बारे में सहयोग करेंगे जो विश्व के विभिन्न भागों में लागू हो सकें. साझा देश एपीपी को अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रो-टेक्नीकल आयोग (आईईसी) में सक्रिय होने के लिए प्रोत्साहित करेंगे, और उत्पादनकर्ताओं के लिए बहु-परीक्षणों के बोझ और उससे पैदा होने वाले अनुत्साह को कम करके, अधिक ऊर्जा कुशल उत्पादों तथा ऊर्जा बचत की नई टेक्नोलोजिओं के लिए अंतर्राष्ट्रीय मंडी के विकास को प्रोत्साहन देंगे. इस परियोजना में मौजूदा परीक्षण विधियों का मूल्यांकन करना और संशोधन करना, और/अथवा परीक्षण के नए मानक तैयार करना शामिल है. यह परियोजना रेफ्रिजिरेटरों के बारे में आईएसओ तथा एपीपी के बीच सहयोग भी सुनिश्चित करेगी. इस परियोजना में ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका भागीदार देश हैं
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इस परियोजना का उद्देश्य है साझा देशों में इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए समन्वित परीक्षण कार्य-विधियों का निर्माण. इस परियोजना के मूल क्षेत्रों के रूप में चार इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों को प्राथमिकता दी गयी है -- टीवी, कंप्यूटर, मॉनिटर, और इन उपकरणों को चलाने वाले सेट टॉप बॉक्स, जो सबसे ज्यादा बिजली खाते हैं. उत्पादों की इन चार प्राथमिकता वाली श्रेणियों में वितरक मंडी और उद्योग के अनुसन्धान और विश्लेषण का लेखा जोखा रखेंगे जिसमें अनुमानित ऊर्जा खपत, वातावरणीय प्रभाव, ऊर्जा बचत संभावनाएं, उपयोग के ढंग, और उद्योग साझेदारी शामिल हैं. इस परियोजना में ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका भागीदार देश हैं.
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यदि कोई बड़े नीतिगत क़दम नहीं उठाये जाते हैं तो सन् 2030 तक साझा देशों में घरेलू बिजली खपत का लगभग 375 TWh/ प्रति वर्ष व्यय स्टैंड बाई बिजली हड़प जाया करेगी (आईईए अनुमानों और आंकडों के अनुसार). विशेषज्ञों ने यह प्रर्दशित कर दिया है कि बहुत से उत्पादों में, जो स्टैंड बाई ऊर्जा नष्ट करते हैं, उनके काम या प्रभावकारिता पर कोई असर डाले बिना यह खपत महत्वपूर्ण स्तर तक और किफायती तरीके से घटाई जा सकती है. इस परियोजना के तहत, भाग लेने वाले देश मौजूदा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पहलों के नींव पर काम आगे बढायेंगे और अनेक प्रकार के उपकरणों में स्टैंड बाई बिजली खपत के स्तर को कम करने के किफायती तकनीकी अवसरों और मंडी रुझानों को बेहतर ढंग से समझने पर ध्यान केन्द्रित करेंगे. इस प्रयास से साझेदारी में शामिल हर देश को ऐसे क़दम उठाने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा जिससे मंडी में ऊर्जा संरक्षण की नयी टेक्नोलोजियों की स्वीकार्यता तेज़ हो ताकि अनावश्यक स्टैंड बाई ऊर्जा खपत कम करने में मदद मिले. ऑस्ट्रेलिया, कैनाडा, चीन, भारत, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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मंडी रूपांतरण को बढ़ावा देने के प्रयास में, वे साझा देश जिनके पास ऊर्जा कुशल उपकरणों के बारे में मंडी उन्मुख व्यापक नीतियों/कार्यक्रमों का भण्डार है, अपने अनुभव बाँटने का इरादा रखते हैं ताकि सीखे गए सबक़ और सर्वोत्तम तौर तरीकों को रेखांकित किया जा सके. इस परियोजना का लक्ष्य है मंडी रूपांतरण नीतियों के बारे में "अच्छे तौर तरीकों की पुस्तिका - विवरणिका" प्रस्तुत करना. जिन क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जायेगा उनमें यह भी शामिल हैं, लेकिन इन्हीं तक सीमित नहीं हैं: ऊर्जा कुशल उत्पादों के लिए स्वैच्छिक लेबलिंग और पहचान कार्यक्रम, उपभोक्ताओं और उत्पादकों दोनों के लिए बिजली क़ीमत में कटौती और कर-प्रोत्साहन, प्रशिक्षण और सूचना अभियान, और खरीदारों की मांग का विश्लेषण ताकि ऊर्जा कुशल उत्पादों की ओर मंडी का रुझान पैदा हो. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है एपीपी साझा देशों के भीतर सरकारी ख़रीद के सर्वोत्तम तरीकों को बढ़ावा देना, तथा सीखे गए सबक़ और सर्वोत्तम तौर तरीकों को रेखांकित करना. इस परियोजना के ज़रिये सभी साझेदार नवाचार अपना कर, और ऊर्जा कुशल उपकरणों का उत्पादन आर्थिक दृष्टि से व्यवहार्य बना कर, ऊर्जा खपत घटाने तथा इसके वातावरणीय बोझ को कम करने के प्रति वचनबद्ध हैं. साझा देश अपनी घरेलू मंडियों में ऊर्जा कुशल उत्पादों का प्रवेश बढ़ाना सुगम बनाने के लिए भी कार्य करेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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मंडी रूपांतरण को प्रोत्साहन देने के प्रयास में, साझा देश भारत के लिए ऊर्जा कुशलता अनुमोदन के लेबल लगाने का कार्यक्रम लागू करने को समर्थन देंगे. साझा देश अपनी घरेलू मंडियों में ऊर्जा कुशल उत्पादों का प्रवेश बढ़ाना सुगम बनाने के लिए भी कार्य करेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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ऊर्जा कुशलता लेबल लगाना ऊर्जा बचत का कारगर प्रबंध सुनिश्चित करने का एक मूल तरीका है, और पूर्ण अर्थव्यवस्था में ऊर्जा बचत पर इसका व्यापक, सकारात्मक, और महत्वपूर्ण प्रभाव होता है. इस परियोजना का लक्ष्य है ऊर्जा कुशलता अनुमोदन लेबलिंग को समन्वित करने का एक मार्गदर्शी अमेरिका-चीन कार्यक्रम चलाना. इस परियोजना के ज़रिये सभी साझेदार नवाचार अपना कर, और ऊर्जा कुशल उपकरणों का उत्पादन आर्थिक दृष्टि से व्यवहार्य बना कर, ऊर्जा खपत घटाने तथा इसके वातावरणीय बोझ को कम करने के प्रति वचनबद्ध हैं. साझा देश अपनी घरेलू मंडियों में ऊर्जा कुशल उत्पादों का प्रवेश बढ़ाना सुगम बनाने के लिए भी कार्य करेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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भवन प्रमाणीकरण के प्रति संस्थागत, मंडी सम्बन्धी, तथा अन्य बाधाओं को दूर करने के लिए, साझा देश मौजूदा प्रमाणीकरण गतिविधियों के बारे में सूचना एकत्र करने, इनके उपयोग को प्रोत्साहित करने, और ऊर्जा बचत निर्मित करने के लिए उनकी प्रभावकारिता को मज़बूत बनाने की दिशा में काम करने का इरादा रखते हैं. इस परियोजना का उद्देश्य है भवन प्रमाणीकरण के लिए जहाँ उचित हो नीति और प्रबंध पद्धतियाँ अपनाने को प्रोत्साहन देना, और मंडी की पारदर्शिता में सुधार लाना जो इमारतों में अधिक ऊर्जा कुशलता के लिए उत्प्रेरक बन सकता है. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का उद्देश्य है भवन ऊर्जा लेबलिंग के बारे में मार्गदर्शी परियोजनाएं चलाना, परीक्षण और मूल्यांकन के विविध तरीकों से संस्थानों का, ऊर्जा कुशलता के प्रति उनकी अवस्थिति तय करने के लिए, मूल्यांकन करना. भवनों का ऊर्जा मूल्यांकन और लेबलिंग केवल ऊर्जा बचत की उनकी क्षमता को ही प्रदर्शित नहीं करेगा बल्कि मंडी पारदर्शिता को भी सुधारेगा जो इमारतों में अधिक ऊर्जा कुशलता के लिए एक उत्प्रेरक हो सकता है. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना के अर्न्तगत मंडी रूपान्तर पहलों के लिए सूचना आदान प्रदान नेटवर्क स्थापित किये जायेंगे, और खिड़कियों की ऊर्जा कुशलता के बारे में लेबलिंग विधियां स्थापित की जायेंगी. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना के तहत एपीपी देशों को हरित भवन दिशानिर्देश तथा सम्बद्ध प्रशिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जायेगी. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है भवन आंकडों और मानकों के बारे में अमेरिकी अनुभवों की जानकारी अन्य साझा देशों के साथ बाँटना. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना में कार्यालय भवनों के कामकाज के लिए ऊर्जा निष्पादन मानक और भवन ऊर्जा रेटिंग विकसित करना शामिल है. भवनों का ऊर्जा मूल्यांकन और लेबलिंग केवल ऊर्जा बचत की उनकी क्षमता को ही प्रदर्शित नहीं करेगा बल्कि मंडी पारदर्शिता को भी सुधारेगा जो इमारतों में अधिक ऊर्जा कुशलता के लिए एक उत्प्रेरक हो सकता है. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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जैसे जैसे इमारतों की ऊर्जा कुशलता में सुधार की नीतियां और कार्यक्रम शुरू किये जाते हैं और/अथवा आगे बढाये जाते हैं, साझा देश भवनों में ऊर्जा की परिमेय बचत की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे, और इमारतों को गर्म रखने, वायु संचार, तथा वातानुकूलन के अधिक कुशल उपकरण स्थापित करने के मार्ग की बाधाओं से निबटेंगे. विशिष्टतः, साझा देश ऊर्जा प्रबंध और वर्तमान इमारतों में कम-खर्च ऊर्जा कुशलता के बारे में प्रशिक्षण कार्यशालाएं चलाएंगे और भारत में मौजूदा इमारतों की ऊर्जा कुशलता बढाने के लिए भारत की हरित भवन परिषद (आईजीबीसी) की शाखाओं द्वारा चलाये जा रहे कार्यक्रमों को समर्थन देने के लिए परिषद के साथ मिलकर काम करेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना के तहत चीन और भारत में मौजूदा इमारतों में ऊर्जा निष्पादन में सुधार के लिए खर्च-रहित या कम-खर्च सिफारिशों का सार प्रस्तुत करने वाली रिपोर्टें तैयार करने का प्रयास किया जायेगा. इसके अलावा साझा देश ठोस ऊर्जा बचत हासिल करने के लिए बिना-खर्च और कम-खर्च उपाय प्रदर्शित करने और अमल में लाने का भी प्रयास करेंगे तथा इमारतों को गर्म रखने, वायु संचार, और वातानुकूलन के अधिक कुशल उपकरण स्थापित करने के मार्ग की बाधाओं से निबटने पर भी ध्यान दिया जायेगा. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है मौजूदा व्यापारिक और रिहायशी इमारतों में ऊर्जा कुशलता सुधारने के लिए सर्वोत्तम विधियों तथा मंडी रूपांतरण की रणनीतियों का उपयोग करना, विशेषकर पश्च-स्थापन की संभावना को आंकने के लिए जाँच का प्रस्तावित ढांचा स्थापित करना. साझा देशों के अनुभवों तथा सिद्ध विधियों को अपना कर, यह नज़रिया उन विपुल सुअवसरों का लाभ उठाता है जो वाजिब खर्च पर ऊर्जा बचत सुधारों के लिए मौजूद हैं. इस परियोजना के तहत, जैसे जैसे इमारतों की ऊर्जा कुशलता में सुधार की नीतियां और कार्यक्रम शुरू किये जाते हैं और/अथवा आगे बढाये जाते हैं, साझा देश भवनों में ऊर्जा की परिमेय बचत की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे, और इमारतों को गर्म रखने, वायु संचार, तथा वातानुकूलन के अधिक कुशल उपकरण स्थापित करने के मार्ग की बाधाओं से निबटेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है मौजूदा व्यापारिक और रिहायशी इमारतों में ऊर्जा कुशलता सुधारने के लिए सर्वोत्तम विधियों तथा मंडी रूपांतरण की रणनीतियों का उपयोग करना, विशेषकर भारत में मौजूदा इमारतों को ठंडा रखने वाले चिलर्स का पश्च-स्थापन. साझा देशों के अनुभवों तथा सिद्ध विधियों को अपना कर यह नज़रिया उन विपुल सुअवसरों का लाभ उठाता है जो वाजिब खर्च पर ऊर्जा बचत सुधारों के लिए मौजूद हैं. इस परियोजना में, जैसे जैसे इमारतों की ऊर्जा कुशलता में सुधार की नीतियां और कार्यक्रम शुरू किये जाते हैं और/अथवा आगे बढाये जाते हैं, साझा देश भवनों में ऊर्जा की परिमेय बचत की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे, और इमारतों को गर्म रखने, वायु संचार, तथा वातानुकूलन के अधिक कुशल उपकरण स्थापित करने के मार्ग की बाधाओं से निबटेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है मौजूदा व्यापारिक और रिहायशी इमारतों में ऊर्जा कुशलता सुधारने के लिए सर्वोत्तम विधियों तथा मंडी रूपांतरण की रणनीतियों का उपयोग करना, विशिष्टतः मौजूदा इमारतों को फिर से चालू करने के लिए मार्गदर्शिका विकसित करना. साझा देशों के अनुभवों तथा सिद्ध विधियों को अपना कर, यह नज़रिया उन विपुल सुअवसरों का लाभ उठाता है जो वाजिब खर्च पर ऊर्जा बचत सुधारों के लिए मौजूद हैं. इस परियोजना में, जैसे जैसे इमारतों की ऊर्जा कुशलता में सुधार की नीतियां और कार्यक्रम शुरू किये जाते हैं और/अथवा आगे बढाये जाते हैं, साझा देश भवनों में ऊर्जा की परिमेय बचत की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे, और इमारतों को गर्म रखने, वायु संचार, तथा वातानुकूलन के अधिक कुशल उपकरण स्थापित करने के मार्ग की बाधाओं से निबटेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है मौजूदा व्यापारिक और रिहायशी इमारतों में ऊर्जा कुशलता सुधारने के लिए सर्वोत्तम विधियों तथा मंडी रूपांतरण की रणनीतियों का उपयोग करना, खास तौर पर ऊंची इमारत में ऊर्जा कुशलता सुधार लागू करना. साझा देशों के अनुभवों तथा सिद्ध तौर तरीक़े अपना कर, यह नज़रिया उन विपुल सुअवसरों का लाभ उठाता है जो वाजिब खर्च पर ऊर्जा बचत सुधारों के लिए मौजूद हैं. इस परियोजना में, जैसे जैसे इमारतों की ऊर्जा कुशलता में सुधार की नीतियां और कार्यक्रम शुरू किये जाते हैं और/अथवा आगे बढाये जाते हैं, साझा देश भवनों में ऊर्जा की परिमेय बचत की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे, और इमारतों को गर्म रखने, वायु संचार, तथा वातानुकूलन के अधिक कुशल उपकरण स्थापित करने के मार्ग की बाधाओं से निबटेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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भवन निर्माण नियमावलियां, उपलब्ध टेक्नोलोजियों और नीतियों के उपयोग के ज़रिये इमारतों में ऊर्जा बचत को उच्चतम सीमा तक बढाने में सहायता कर सकती हैं. इस परियोजना के अर्न्तगत, हर साझा देश भवन नियमावलियों तथा सम्बद्ध मामलों पर सूचना आदान -प्रदान को सुसाध्य बनाने के लिए मिलकर काम करेगा जैसेकि नीति पद्धतियाँ, मूल्यांकन और वर्गीकरण पद्धतियाँ, और कार्यान्वयन के ज़रिये सीखे गए सबक. इन क़दमों से, नियमावलियों को सुधारने में लगने वाले समय और खर्च को कम करके, भवन निर्माण सामग्री और पद्धतियों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बढा कर, और भवन निर्माण से सम्बद्ध कम्पनियों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढा कर नई मंडियां विकसित करने के लिए आधार तैयार होगा. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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साझा देश खिड़की वर्गीकरण कार्यविधियों और लेबलिंग के विकास तथा समन्वयन के लिए मिलकर काम करेंगे. साझा देश चीन में खिड़की वर्गीकरण और लेबलिंग कार्यक्रम स्थापित करने का प्रयास करेंगे तथा ऑस्ट्रेलिया, भारत, और चीन में एनर्जी-प्लस, थर्म, और विण्डो निर्माण अनुरूपण कार्यक्रमों के इस्तेमाल के बारे में प्रशिक्षण कार्यशालाएं चलाएंगे. इन क़दमों से, नियमावलियों को सुधारने में लगने वाले समय और खर्च को कम करके, भवन निर्माण सामग्री और पद्धतियों का अंतर्राष्ट्रीय व्यापार बढा कर, और भवन निर्माण से सम्बद्ध कम्पनियों के बीच अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढा कर नई मंडियां विकसित करने के लिए आधार तैयार होगा. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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एपीपी का सतत जीवनक्षम भवनों सम्बन्धी आँकड़ों का वेब पोर्टल इस उद्देश्य से तैयार किया गया है कि एपीपी देशों में उदाहरण-योग्य और सतत जीवन-क्षम इमारतों के बारे में सूचना उपलब्ध कराई जाए, और इसका पता है: www.asiapacificpartnership.org/sustainable-buildings.html. यह सूचना साझा देशों को भवन निर्माण परियोजनाओं, नीति सम्बन्धी पहलों और प्रदर्शनों में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराई जायेगी. भागीदार देशों को आशा है कि भवन निर्माण की बेहतर कार्यविधियों, निर्माण सामग्री, उपकरणों, नियंत्रणों और निरंतर प्रबंध, और इमारतों में विपदा सहने की बेहतर व्यवस्था के ज़रिये, बिजली की सर्वाधिक मांग के समय ऊर्जा खपत में कमी, और उससे सम्बद्ध कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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बीजिंग में उच्च निष्पादन वाली कई इमारतें निर्मित अथवा सम्वर्धित की जा रही हैं, जिससे ऊर्जा खपत और खर्च में तो कमी आ ही रही है, साथ ही ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में भी कमी आ रही है. इन भवनों में शामिल हैं: महापौर का प्रशिक्षण केंद्र जो महापौरों की अर्ध-वार्षिक प्रशिक्षण बैठकों के दौरान उच्च निष्पादन वाली इमारतों के निर्माण की टेक्नोलॉजीयां प्रदर्शित करेगा; ओलंपिक ग्राम का माइक्रो-ऊर्जा भवन जहाँ ओलंपिक खेलों के दौरान 17,000 खिलाड़ी ठहरे थे; तथा जीवनक्षम डिजाईन और टेक्नोलॉजी विशिष्टता केंद्र. ये हरित इमारतें सम्पूर्ण चीन में तथा अन्य एपीपी देशों के लिए उच्च निष्पादन भवनों के निर्माण के सिद्धांतों की जानकारी के प्रसार, और इन इमारतों के निर्माण और रख-रखाव में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के व्यापार में वृद्धि का अवसर उपलब्ध करती हैं. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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विश्व जीवनक्षम भवन (एसबी) सम्मलेन श्रृंखला, जिसका हर तीन वर्ष बाद आयोजन किया जाता है, ऐसी शीर्ष बैठक है जिसमें सतत जीवनक्षम निर्मित वातावरणों के अग्रणी तकनीकी विशेषज्ञ और अनुसंधानकर्ता शामिल होते हैं. एसबी08 सम्मलेन में साझा देशों ने विश्व हरित भवन परिषद के साथ संयुक्त बैठक की, एपीपी के पूर्ण सम्मलेन में भाग लिया, और अति-शहरीकरण पर एक विशेष गोष्ठी आयोजित की. साझेदारों ने एक प्रदर्शनी में भी भाग लिया जिसमें ऊर्जा कुशलता वाले उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित किया गया ताकि उन्नत भवन डिजाईन में इस्तेमाल के लिए क्षेत्रों/परियोजनाओं की शिनाख्त में मदद मिले. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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भाग लेने वाले साझेदार इस उद्देश्य से अनेक क्षेत्रों में काम करेंगे कि सीखे गए सबक़, और अच्छी विधियों की शिनाख्त हो सके, तथा बिजली, गैस आदि सप्लाई करने वाली इकाईयों के नियमन और प्रोत्साहन के लिए सिफारिशें तय हों, और कारगर डीएसएम कार्यक्रमों को बढावा मिले. इस कार्य से साझा देशों में बिजली सप्लाई कंपनियों को अपने संसाधनों का अधिक बड़ा हिस्सा भवनों में ऊर्जा कुशलता लागू करने और उसके लिए धन जुटाने में लगाने का मौक़ा मिल सकेगा. इससे उन्हें रिहायशी और व्यापारिक ग्राहकों को ऊर्जा कुशल उपकरण, संयंत्र, और सेवाएं मुहैय्या कराने में अधिक विस्तृत भूमिका निभाने का भी अवसर मिलेगा. ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का उद्देश्य है बिजली आदि सप्लाई करने वाली इकाईयों के नियमन, प्रोत्साहन, तथा कार्यक्रमों में सुधार के लिए एपीपी देशों के बीच तकनीकी सहयोग लागू करना. भाग लेने वाले साझेदार देश इस विषय से निबटने के लिए कई क्षेत्रों में कार्य करेंगे, जैसेकि बिजली सप्लाई कंपनियों में पूँजी निवेश और ऊर्जा कुशल कार्यक्रम लागू करने के मार्ग की बाधाओं को दूर करने के नए तरीकों के सफल नमूनों की शिनाख्त और उन्हें आपस में बांटना. इस कार्य से साझा देशों में बिजली सप्लाई कंपनियों को अपने संसाधानोँ का अधिक बड़ा हिस्सा भवनों में ऊर्जा कुशलता लागू करने और उसके लिए धन जुटाने में लगाने का मौक़ा मिल सकेगा. इससे उन्हें रिहायशी और व्यापारिक ग्राहकों को ऊर्जा कुशल संयंत्र, उपकरण, और सेवाएं मुहैय्या कराने में अधिक विस्तृत भूमिका निभाने का भी अवसर मिलेगा. ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
“स्मार्ट सिस्टम” कहलाने वाली चतुर और फुर्तीली पद्धतियाँ क्षमता वृद्धि की ऐसी मूल टेक्नोलॉजी है जो बिजली, गैस आदि कंपनियां चलाने वालों और उपभोक्ताओं के लिए ज्ञान, नियंत्रण, और कुशलता के नवीन विकल्प बढा देती है. ये टेक्नोलॉजियां बिजली (या प्राकृतिक गैस जैसे अन्य स्रोतों को) सप्लाई करने वालों और उपभोक्ताओं के बीच सूचना के अधिक परिष्कृत आदान-प्रदान का, और बिजली पद्धतियों के संचालन को बेहतर बनाने और खर्च घटाने का, अवसर उपलब्ध कराती हैं. यह परियोजना बिजली कंपनियों को चतुर पद्धतियाँ लागू करने के व्यापारिक लाभों का मूल्यांकन करने में सहायता देगी, और उन्हें अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण गतिमयता लाएगी. इस परियोजना में रिहायशी क्षेत्र में भी चतुर पद्धतियों का उपयोग बढ़ने पर ध्यान दिया जायेगा, और इसके लिए बिजली कंपनियों और उद्योग विशेषज्ञों के साथ काम करते हुए, इनके व्यापक उपयोग को प्रोत्साहन देने के व्यापारिक कारणों, और उसे सुगम बनाने के साधनों, को समर्थन प्रदान किया जायेगा. ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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कुशलता के उच्च स्तर प्राप्त करने के लक्ष्य से डिजाईन की गई इमारतें, निष्पादन के कारगर प्रबंध के अभाव में अक्सर अपनी क्षमता से कहीं कम स्तर पर काम करती हैं, और कभी कभी इनमें ऊर्जा खपत और संचालन व्यय दुगुना हो जाता है. सामान्य व्यापारिक पट्टों में इमारत का ऊर्जा खर्च किरायेदार चुकाता है लेकिन उसका उपकरणों के संचालन पर कोई नियंत्रण नहीं होता और वह यह गारंटी नहीं कर सकता, और कभी कभी तो इसका मापन भी नहीं कर सकता, कि संयंत्र और उपकरण इच्छानुसार अथवा अनुबंध के अनुरूप ऊर्जा कुशलता प्राप्त कर रहे हैं या नहीं. दूसरी ओर इमारत के मालिक के लिए संयंत्रों और उपकरणों के समुचित रख-रखाव या उन्हें अपग्रेड करने, अथवा इमारत में ऊर्जा निष्पादन का उच्च स्तर प्राप्त करने के लिए कोई प्रेरणा नहीं होती. यह परियोजना भाग लेने वाले साझा देशों में हरित पट्टों का उपयोग बढा कर, मालिक और किरायेदार के इस प्रेरणा-विभाजन को दूर करने में सहायक होगी, जोकि व्यापारिक इमारतों के संचालन में ऊर्जा कुशलता प्राप्त करने की राह की एक बाधा है. राष्ट्रों के अनुरूप ढाले गए पट्टों और उन्हें सहारा देने वाले साधनों का विकास किया जायेगा और सरकार द्वारा प्रदर्शनों, और उद्योग में इसके समर्थकों तथा पूँजी निवेश क्षेत्र के सहयोग से इन्हें बढावा दिया जायेगा. ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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साझा देश ऊर्जा कुशलता निर्माण में पूँजी निवेश बढ़ने के लिए अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करेंगे, ऊर्जा कुशलता में निजी पूँजी निवेश की बाधाओं को दूर करने के लिए संयुक्त परियोजनाएं चलाएंगे, और चुने हुए आदर्श नमूने प्रदर्शित करेंगे. यह दल विविध प्रकार की इमारतों की ऊर्जा खपत के आंकड़े एकत्र करके उनका विश्लेषण करेगा और साझा देशों के साथ बंटेगा. ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का उद्देश्य है भारत में सार्वजनिक स्वामित्व अथवा सार्वजनिक तौर पर संचालित इमारतों में ऊर्जा सुधार की संभावनाओं और मंडी आकार के बारे में प्रथम आकलन उपलब्ध कराना, तथा मंडी में मौजूद ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कटौती की संभावनाओं को आंकना. साझा देश भवन किस्मों, फर्श क्षेत्रफल, और ऊर्जा उपयोग के बारे में वृहत-आंकड़ों के मूल्यांकन का प्रयास करेंगे; विभिन्न किस्म की सार्वजनिक इमारतों के ऊर्जा उपयोग आंकड़े एकत्र करेंगे; और सार्वजनिक इमारतों की किस्मों और फर्श क्षेत्रफल के अनुमान लगाने के लिए सरकारी विभागों के पूर्ण सर्वेक्षण करेंगे. ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है इमारतों में ऊर्जा कुशलता कार्यक्रमों के लिए निजी पूँजी निवेश स्तरों में वृद्धि को सुगम बनाना. साझा देश ऊर्जा कुशलता में पूँजी निवेश के लिए निजी वित्त-प्रबंध और ठेके देने के मार्ग के अवरोधों को दूर करने की सफल आदर्श विधियों की पहचान करेंगे, और उनके बारे में जानकारी का आदान प्रदान करेंगे. इन बाधाओं को दूर करने के लिए साझा देश स्वेच्छा से संयुक्त परियोजनाओं की शिनाख्त करेंगे और उन्हें लागू करेंगे. ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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बहुत से देशों में अनेक प्रकार के उत्पादों के परीक्षण के लिए विधियां, मानक, और लेबल व्यवस्थाएं मौजूद हैं. लेकिन अधिकांश मामलों में ये परीक्षण विधियां और उनसे जनित निष्पादन स्तर अलग अलग हैं. नतीजा यह होता है कि उत्पादनकर्ताओं को दुनिया भर की इन मंडियों में माल बेचने के लिए अलग अलग परीक्षणों और गुणवत्ता आश्वासनों को पूरा करना पड़ता है. बहुत से उत्पादों के लिए समन्वित परीक्षण विधियां स्थापित करना पूरी तरह संभव है और इससे साझा देशों को बहुत लाभ होगा तथा उत्पादनकर्ताओं को विश्व भर में अलग अलग मानकों का पालन करने का जो बोझ ढोना पड़ता है वह कम होगा. इस परियोजना में सघन प्रतिदीप्त बत्तियों (कॉम्पेक्ट फ्लूरेसेंट लैंप -सीएफएल) की परीक्षण विधियों के समन्वयन पर ध्यान केन्द्रित किया जायेगा. अपेक्षा है कि इससे साझा देशों में बिजली की सर्वाधिक मांग के समय रिहायशी और व्यापारिक ऊर्जा उपयोग में समुचित खर्च पर औसतन कम से कम 5% की कटौती हासिल की जा सकेगी. ऑस्ट्रेलिया, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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मंडी रूपांतरण को प्रोत्साहन देने के प्रयास में, साझा देश जिनमें अनेक मंडी उन्मुख नीतियां और कार्यक्रम चल रहे हैं, भारत में ऊर्जा कुशलता मानकों और लेबलिंग कार्यक्रम के ज़रिये जलवायु परिवर्तन में कमी लाने के बारे में अपने अनुभव बाँटने का इरादा रखते हैं. साझा देश जिन कामों को आगे बढायेंगे उनमे रेफ्रिजिरेटरों, वातानुकूलन और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए मंडी रूपांतरण रणनीतियों की पहचान करना, प्रभाव आकलन, संवर्धन और प्रसार शामिल है. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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शहरी जलवायु परियोजना दल, स्वच्छ और कुशल शहरों के निर्माण को बढ़ावा देने के प्रयास में, संभाव्य शहरों की यात्रा करने और त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने की योजना रखता है. संचालन और तकनीकी सलाहाकार दल में शहर स्तर के स्वैच्छिक सलाहकार कार्रवाई दलों के सदस्य भी शामिल होंगे. प्रगति आकलन के लिए कार्यकारी दल आधार उत्सर्जन दृश्यपटल पर काम करेगा. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है मौजूदा व्यापारिक और रिहायशी इमारतों में ऊर्जा कुशलता सुधारने के लिए सर्वोत्तम विधियों और मंडी रूपांतरण रणनीतियों को काम में लाना, और इसके अर्न्तगत विशिष्टतः भारत में इमारत कुशलता संवर्धन पर काम किया जायेगा. इसके तहत साझा देशों के अनुभवों को बाँट कर और वे तरीके अपना कर जो सफल सिद्ध हो चुके हैं, उन प्रचुर अवसरों का लाभ उठाया जायेगा जो समुचित लागत पर ऊर्जा बचत के लिए मौजूद हैं. इस परियोजना में, जैसे जैसे इमारतों की ऊर्जा कुशलता में सुधार की नीतियां और कार्यक्रम शुरू किये जाते हैं और/अथवा आगे बढाये जाते हैं, साझा देश भवनों में ऊर्जा की परिमेय बचत की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे, और इमारतों को गर्म रखने, वायु संचार, तथा वातानुकूलन के अधिक कुशल उपकरण स्थापित करने के मार्ग की बाधाओं से निबटेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है मौजूदा व्यापारिक और रिहायशी इमारतों में ऊर्जा कुशलता सुधारने के लिए सर्वोत्तम विधियों और मंडी रूपांतरण रणनीतियों को काम में लाना, विशिष्टतः भारत में ऊर्जा प्रबंध के क्षेत्र में. इसके तहत साझा देशों के अनुभवों को बाँट कर, और वे तरीके अपना कर जो सफल सिद्ध हो चुके हैं, उन प्रचुर अवसरों का लाभ उठाया जायेगा जो समुचित लागत पर ऊर्जा बचत के लिए मौजूद हैं. इस परियोजना में, जैसे जैसे इमारतों की ऊर्जा कुशलता में सुधार की नीतियां और कार्यक्रम शुरू किये जाते हैं और/अथवा आगे बढाये जाते हैं, साझा देश भवनों में ऊर्जा की परिमेय बचत की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे, और इमारतों को गर्म रखने, वायु संचार, तथा वातानुकूलन के अधिक कुशल उपकरण स्थापित करने के मार्ग की बाधाओं से निबटेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है चीन में एक मौजूदा इमारत में पहली बार हरित पश्च-स्थापन संपन्न करना जिसमें भू-तापीय वातानुकूलन, वायुसंचार, और ऊर्जा नियंत्रण पद्धतियाँ शामिल हैं. आस्ट्रेलियाई साझेदार इमारत चालू करने और सर्वोच्च उपयोगिता प्राप्त करने का अध्ययन करेंगे, डिजाईन और विधि-विधान में योगदान करेंगे, उपकरण और संयंत्र लगायेंगे, और कार्य अध्ययन तैयार करेंगे. यह कार्यक्रम डिजाईन, टेक्नोलॉजी, शिक्षा, और निपुणता हस्तांतरण के ज़रिये चीन में वातावरणीय सुधारों में सहायता देने की ऑस्ट्रेलिया की "सतत संपोषण" निर्यात क्षमताओं को प्रर्दशित करेगा. सक्रिय भागीदारों में ऑस्ट्रेलिया और चीन की कई कंपनियां, तिएन्जिन वातावरण संरक्षण ब्यूरो, और तिएन्जिन विश्वविद्यालय शामिल हैं. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का उद्देश्य है बड़े स्तर पर ऊर्जा कुशल भवन डिजाईन विधियां अपना कर, तथा भारत की भवन ऊर्जा संरक्षण संहिता (ईसीबीसी) का पालन करके, नई व्यापारिक इमारतों को उच्च निष्पादन इमारतें बनाया जाय; ईसीबीसी का पालन करने वाली उच्च निष्पादन व्यापारिक इमारतों से बिजली की कुल मांग घटाने पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाये; और आंकडे एकत्र करके, जानकारी का आदान प्रदान करके, क्षमता बढा कर, तथा नीति ढांचे का विकास करके इन डिजाईनों और ईसीबीसी नियमों को अपनाने की राह में आने वाली जानी पहचानी बाधाओं को दूर किया जाये. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है भारत में एक मार्गदर्शी क्षेत्रीय ऊर्जा कुशलता केंद्र स्थापित करना; ऊर्जा उपभोक्ताओं और जन साधारण में ऊर्जा कुशलता के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा शिक्षा का प्रसार; ऊर्जा कुशल उत्पादों के प्रदर्शन को सुगम बनाना; टेक्नोलॉजी विकास को बढ़ावा देना; अनुसन्धान और विभिन्न शाखाओं के बीच सहयोग को बढ़ावा देना; और भारत में ऊर्जा कुशल मंडी और व्यापारों की वृद्धि और विकास उत्प्रेरित करना. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है ऊर्जा कुशल इमारतों में निष्क्रिय डिजाईन और सौर ऊर्जा टेक्नोलॉजियों के लिए ढांचा स्थापना को प्रोत्साहन देना. इस परियोजना में भाग लेने वाले एक साझा ढांचे के भीतर पुष्ट तकनीकी और आर्थिक सूचना एकत्र और वितरित करेंगे. यह सूचना साझा देशों को भवन निर्माण परियोजनाओं, नीति पहलों और उनके प्रदर्शन में इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराई जायेगी. साझा देशों को उम्मीद है कि बेहतर भवन निर्माण विधियों, निर्माण सामग्री, उपकरणों, नियंत्रणों और सतत प्रबंध, तथा भवनों में बेहतर विपदा प्रतिरोध के ज़रिये बिजली की सर्वाधिक मांग के सन्दर्भ में ऊर्जा खपत में और सम्बद्ध कार्बन डाई ऑक्साइड उत्सर्जन में कमी हासिल की जा सकेगी. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का उद्देश्य है भारतीय इमारतों में उच्च टेक्नोलॉजी उद्योगों के लिए, जिनमें प्रयोगशालाएं, स्वच्छ कक्ष और डेटा केंद्र शामिल हैं, ऊर्जा कुशलता के लिए क्षमता विकास और मंडी रूपांतरण में सहायता देना. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का लक्ष्य है चीन में मौजूदा इमारतों के लिए ऊर्जा और ग्रीनहाउस गैस सम्बन्धी वर्गीकरण के लिए उपकरण विकसित करना. इसके लिए ऑस्ट्रेलिया के ग्रीन हाउस श्रेणी निर्धारण साधन (एबीजीआर) का नमूने के तौर पर इस्तेमाल किया जायेगा. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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मंडी रूपांतरण को प्रोत्साहन देने के प्रयास में, साझा देश जिनके यहाँ ऊर्जा कुशल उपकरणों से सम्बद्ध व्यापक मंडी उन्मुख नीतियां/कार्यक्रम विद्यमान हैं, सीखे गए सबक़ और अनुभव बांटने तथा सर्वोर्त्तम नीतियों को रेखांकित करने का इरादा रखते है, विशिष्टतः ऊर्जा और वातावरण सम्बन्धी सर्वोत्तम विधियों के आदान प्रदान के लिए भारत-अमेरिकी शहर साझेदारी के माध्यम से. इस परियोजना के तहत सभी साझेदार, नए तौर तरीक़े अपना कर और ऊर्जा कुशल उपकरणों का उत्पादन जीवन क्षम बना कर, ऊर्जा उपभोग घटाने और उसके वातावरणीय बोझ को कम करने के प्रति वचनबद्ध हैं. साझा देश अपनी घरेलू मंडियों में ऊर्जा कुशल उत्पादों का प्रवेश सुगम बनाने के लए भी काम करेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, कोरिया, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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इस परियोजना का उद्देश्य है मौजूदा व्यापारिक और रिहायशी इमारतों में ऊर्जा कुशलता सुधारने के लिए सर्वोत्तम विधियों और मंडी रूपांतरण रणनीतियों को लागू करना, विशिष्टतः चीन में मौजूदा इमारतों के नवीकरण पर ध्यान केन्द्रित करके. इस परियोजना में, जैसे जैसे इमारतों की ऊर्जा कुशलता में सुधार की नीतियां और कार्यक्रम शुरू किये जाते हैं और/अथवा आगे बढाये जाते हैं, साझा देश भवनों में ऊर्जा की परिमेय बचत की संभावनाओं का अध्ययन करेंगे, और इमारतों को गर्म रखने, वायु संचार, तथा वातानुकूलन के अधिक कुशल उपकरण स्थापित करने के मार्ग की बाधाओं से निबटेंगे. ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान, और संयुक्त राज्य अमेरिका इस परियोजना में भागीदार देश हैं.
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हरितस्थान-टीएम परियोजना यह प्रदर्शित करने में सहायक होगी कि टेक्नोलॉजी, डिजाईन, और जीवनशैली परिवर्तनों के ज़रिये इमारतों में ऊर्जा उपभोग को 40% से 10% घटाना आर्थिक रूप से संभव है. नवीकरणीय स्रोतों का इस्तेमाल करके किसी व्यापारिक इमारत में प्रयुक्त ऊर्जा में (मुख्यतः जीवाश्म ईंधन से प्राप्त ग्रिड बिजली) कमी सामने आने से, हमारे सामूहिक कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जन भी कम होंगे. इस परियोजना में यह प्रर्दशित किया जायेगा कि हरितस्थान-टीएम योजना जीवनक्षम है और इसलिए इसे अन्य देशों में भी दोहराया जा सकता है. इस परियोजना में भारत प्रधान साझेदार है और भाग लेने वाले अन्य देश हैं अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, जापान, कैनाडा, और चीन.
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This project aims to develop a building certification program to act as a nationally accepted benchmark for the design, construction and operation of high performance energy efficient buildings in China. The buildings sector, including appliances, accounts for about 25% of total electricity use in China (about 590 TWh/year), and a similar percentage of China’s greenhouse gas emissions. China adds 2 billion square meters of buildings every year. Its largest buildings cover nearly 43 billion square meters of floor space, yet only 4% of them have adopted energy - efficiency measures. In addition, building energy consumption has increased more than 10% each year for the last 20 years. To reduce energy use and emissions in this sector, it is critical to demonstrate-and build capacity for implementing-efficient building technologies and practices throughout China. Key measures include: 1) building energy efficiency measures into the design phase of new construction through demonstration and training; and 2) reducing energy use in existing buildings through building retrofits and effective low or no-cost operations and maintenance measures, including using more efficient office equipment and appliances. China & the United States are participating Partners in this project.
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इस परियोजना का उद्देश्य है मंडी-आधारित उद्यम के नज़रिए और तकनीकी स्रोतों के ठोस उपयोग के ज़रिये चीन की मौजूदा इमारतों में ऊर्जा का इस्तेमाल और उत्सर्जन कम करना। इस परियोजना से बिना-ख़र्च या कम-ख़र्च वाले संचालन के सर्वोत्तम तरीक़ों के इस्तेमाल और सीमित तकनीकी सुधारों के ज़रिये चीन की मौजूदा इमारतों में ऊर्जा दक्षता बढेगी। इस परियोजना का दूसरा लक्ष्य और प्रत्याशित दीर्घ-कालिक परिणाम होगा इमारतों में ऊर्जा का इस्तेमाल घटाने के लिए एक बड़े-स्तर के व्यवहारिक उपाय की चीन की आवश्यकता को पूरा करना। इन विधियों से चीन के सन 2010 तक ऊर्जा तीव्रता में 20% की कमी लाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। चीन और अमेरिका इस परियोजना में भाग लेने वाले साझीदार हैं।
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इमारतों में ऊर्जा के इस्तेमाल में चीन संपूर्ण विश्व में दूसरे नंबर पर है, जो सभी एपीपी देशों की इमारतों में इस्तेमाल की जाने वाली ऊर्जा का 29%, और संपूर्ण विश्व के कुल ऊर्जा ख़र्च का 14% है। सन् 1995 और 2005 के बीच, चीन की व्यापारिक इमारतों में इस्तेमाल की जाने वाली ऊर्जा की प्रति वर्ष वृद्धि दर 7.7% थी, जो एपीपी देशों में सबसे अधिक है। उसके बाद 3.4% की दर के साथ औस्ट्रेलिया और 1.5% की दर के साथ भारत का नम्बर आता है (आईईए 2007)। ऊर्जा की मांग और खपत के बीच संतुलन बनाए रखने की कठिन चुनौती का सामना करते हुए चीन ने सन् 2010 तक अपनी नई इमारतों को 50% अधिक ऊर्जा कुशल बनाने के लक्ष्य की घोषणा की है। अधिकाधिक यह माना जाने लगा है कि चीन में इमारतों की ऊर्जा कुशलता बढ़ाने में भवन ऊर्जा संहिताएं एक सबसे प्रभावकारी साधन हैं। इस परियोजना के लक्ष्यों में शामिल हैं: 1) चीन के मध्यम और लघु आकर के शहरों में भवन ऊर्जा कुशलता संहिताओं के पालन और कार्यान्वयन में सुधार के लिए रणनीतियां उपलब्ध कराना; 2) इमारतों के जांचकर्ताओं, उनका डिज़ाइन तैयार करने वालों, भवन निर्माण कंपनियों और उस काम में लगे अन्य प्रमुख लोगों को प्रशिक्षण और सूचना प्रदान करना जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ऊर्जा संहिता का और अधिक पालन करने के लिए उनके पास आवश्यक साधन हैं; 3) मंडी आधारित द्वि-लक्षीय प्रोत्साहन कार्यक्रमों का परीक्षण (सूचना अभियान और ऊर्जा कुशल सामग्री की थोक खरीद) जिससे संहिता लागू किये जाने को समर्थन मिले; और 4) परियोजना के प्रभाव के संवर्धन के लिए सीखे हुए पाठों तथा प्रशिक्षण सामग्री का राष्ट्र व्यापी वितरण। चीन और अमरीका इस परियोजना में भाग लेने वाले साझीदार हैं ।
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इस परियोजना का लक्ष्य है शुद्ध शून्य ऊर्जा गृह संघ (एनज़ीईएच) या एक अन्तर्राष्ट्रीय एनज़ीईएच वार्तालाप की स्थापना करना । इस परियोजना के अंग के रूप में, साझेदार ऐसी औपचारिक अन्तर्राष्ट्रीय साझेदारी स्थापित करने के लिए सहयोगी वार्तालाप शुरू करेंगे जो एनज़ीईएच हासिल करने की राह का नक्शा तैयार करे । कार्यशालाओं और सहयोगी बैठकों की श्रृंखला के ज़रिए, साझेदार श्रेष्ठतम गृह कुशलता की मिसाल स्थापित करने का प्रयास करेंगे और इसके लिए इस क्षेत्र की विभक्त आपूर्ति-श्रृंखला को एक साथ लाने और सम्बद्ध मुद्दों तथा उद्योग बाधाओं के बारे में विचार विमर्श का रास्ता अपनाया जाएगा । कार्यशालाओं में इस उद्योग, वास्तविक उदाहरण अध्ययन, अनुसंधान और विकास, तथा प्रमाण प्रदर्शनों का प्रमुख रूप से उपयोग किया जाएगा । विषय को सम्पूर्णता में देखने का यह नज़रिया साझेदारों को ऊर्जा-कुशल आवास के डिज़ाइन और विकास के क्षेत्र में विश्व नेताओं के रूप में सामने लाएगा । सहभागिता सर्वोत्तम समाधानों की पहचान को गति प्रदान करेगी और नई विधियों के लिए परिस्थितियों में सुधार लाएगी । इसमें भाग लेने वाले साझेदार हैं औस्ट्रेलिया, कनाडा, चीन, जापान, कोरिया और अमेरिका ।
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इस योजना का उद्देश्य है ऊर्जा पुनर-प्राप्ति सम्वातकों (जिनमें ताप पुनर्प्राप्ति वेन्टीलेटर शामिल है) के परीक्षण की समन्वित कार्यविधि विकसित करना । इसमें ऊर्जा कुशलता और/अथवा ऊर्जा उपभोग का मापन भी शामिल है जिसे इन उत्पादों के वर्गीकरण, नियामक मानकों या स्वैच्छिक स्तरों में रुचि रखने वाले अन्य देश भी अपना सकें - जिन्हें प्रैक्टिस मौडल समुदायों की संज्ञा दी गई है । इस परियोजना के तहत विकसित नई क्रियाविधियों को साझ किया जाएगा और अन्तर्राष्ट्रीय मानक संगठन (आईएसओ) जैसी अन्तर्राष्ट्रीय एजेन्सी या मानक तय करने वाली एजेन्सी को औपचारिक मानकों की सिफ़ारिश की जाएगी । साझेदार ऐसा आधार स्थापित करने का प्रयास करेंगे जिस पर ऊर्जा कुशलता परीक्षण सुविधाओं के प्रमाणीकरण और उन सुविधाओं में किए गए परीक्षणों के परिणामों की पारस्परिक स्वीकार्यता प्राप्त हो सके । इसमें भाग लेने वाले साझेदार देश हैं कनाडा, जापान, कोरिया, अमेरिका ।
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इस परियोजना के तहत भवन आवरण अवयवों के प्रमाणन का ऐसा कार्यक्रम विकसित किया जायेगा जो उच्च निष्पादन ऊर्जा कुशल इमारतों के ड़िज़ाइन, निर्माण और संचालन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य मानक बन जाए. यह प्रस्तावित भवन आवरण अवयवों, यानी खिड़की-दरवाज़ों, छत और दीवारों, की कुशलता का न्यूनतम स्तर स्थापित कर देगा. प्रमाणीकरण कार्यक्रम उत्पादों का ऊर्जा निष्पादन स्तर उपलब्ध कराएगा जो लेबल पर अंकित होगा. लेबल लगे और ऊर्जा कुशलता के अनुसार वर्गीकृत उत्पादों से भवन निरीक्षकों को भारत में ऊर्जा संरक्षण निर्माण संहिता (ईसीबीसी) के अनुपालन को प्रमाणित करने का एक साधन मिल जाएगा. भारत और अमेरिका इसमें भाग लेने वाले साझेदार देश हैं.