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एल्यूमिनियम कार्य बल कार्ययोजना (अंग्रेजी में) - पीडीएफ फॉर्मैट
| ATF–06–01 | एल्यूमिनियम मापन और मानकीकरण |
| ATF–06–02 | पीएफसी उत्सर्जन का प्रबंधन* |
| ATF–06–03 | बॉक्साइट अवेशेषों (रेड मड) का प्रबंधन* |
| ATF–06–04 | उन्नत सिलिका बॉक्साइट संसाधन |
| ATF–06–05 | फ्लोराइड उत्सर्जन का प्रबंधन |
| ATF–06–06 | एल्यूमिनियम पुनर्प्रयोग |
| ATF–06–07 | तकनीकी प्रबंधकों से संयोजन |
| ATF–09–08 | स्वचालित एनोड प्रभाव नियंत्रण के लिए सार्वजनिक कम्प्यूटर सौफ़्टवेयर का विकास |
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Download APP Benchmarking and Measurement Project 2008
Download APP Benchmarking and Measurement Project 2009
यह परियोजना एल्यूमीनियम सस्टेनेबिलिटी के मापन व मानकीकरण के लिए एक कार्यप्रणाली और इंडिक्स विकसित करने का इरादा रखती है और इसका उद्देश्य साझीदारों को डाटा कलेक्शन के लिए बेसलाइन जानकारी मुहैया कराना है। साझीदारों द्वारा नवीकृत इंडिक्स का इस्तेमाल उन अन्य परियोजनाओं के साथ किया जाएगा, जो परफ्लूरोकार्बन के उत्सर्जन के प्रबंधन, फ्लूराइड उत्सर्जन प्रबंधन और भविष्य की योजनाओं की बुनियाद तैयार करने में मदद कर रही है। उद्योग सहमति-पत्र में परिभाषित उत्सर्जन प्रबंधन की प्रगति की समीक्षा हर तीन साल पर की जाएगी। ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान और अमेरिका इस परियोजना में साझीदारी कर रहे हैं।
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यह परियोजना एल्यूमीनियम उत्पादन के दौरान परफ्लूरोकार्बन (पीएफसी) के प्राथमिक स्रोतों यानी इलेक्ट्रोलिटिक सेल्स में एनोड के प्रभावों को आशानुरूप बनाने की तकनीकी रूप से उचित अवसरों को पहचानने और उन्हें सस्ते में लागू करने के लिए सभी साझीदार देशों को बुनियादी उत्पादन सुविधाओं से सक्षम बना रही है। यह पीएफसी के सामान तैयार करने के लिए आवश्यक उपकरण जुटाने और किसी खास प्रछालक संबंधी पीएफसी उत्सर्जन को कम करने की रणनीति के विकास अभिग्रहण के संदर्भ में सरकारों को सूचित करने में दक्ष है। इस परियोजना में एल्यूमीनियम प्रगलन से होने वाले ग्रीन हाउस उत्सर्जन के वर्तमान और भविष्य के स्तर को कम करने की जबरदस्त क्षमता है। ऑस्ट्रेलिया, चीन और अमेरिका इस परियोजना में साझीदारी कर रहे हैं।
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Download Management of Bauxite Residue: Priority Research Areas
Download Review of Bauxite Residue Alkalinity and Associated Chemistry
Download Review of Current Bauxite Residue Management, Disposal and Storage: Practices, Engineering, and Science
Download Review of Bauxite Residue "Re-Use" Options
दुनिया भर में एल्यूमिना से एल्यूमीनियम का उत्पादन होता है। एल्यूमिना बॉक्साइट नामक अयस्क से निकलती है। एक टन एल्यूमिना के उत्पादन में करीब डेढ़ से दो टन बॉक्साइट अवशेष (रेड मड भी कहते हैं) निकलता है, जो पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या है। काफी उर्जा का इस्तेमाल करने के बावजूद अभी तक इतनी बड़ी मात्रा में निकलने वाले बॉक्साइट अवशेषों के उपयोग का कोई भी आर्थिक रूप से वहनीय और पर्यावरण के लिहाज से अनुकूल समाधान नहीं मिल सका है। इस परियोजना में साझीदार देश इन अवशेषों के विभिन्न प्रकार से इस्तेमाल के लिए ठोस आर्थिक और तकनीकी विकल्पों पर काम कर रहे हैं, जिनमें इस्पात और सीमेंट उद्योगों में इनका उपयोग, भौतिक और रासायनिक तरीके से इन्हें स्थिर करना और इन अवशेषों के भंडारण में स्थान व समय, दोनों को कम करना शामिल है। ऑस्ट्रेलिया, चीन और भारत इस परियोजना में साझीदारी कर रहे हैं।
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Download High Silica Bauxite General Literature Review
एल्यूमिना की दुनिया भर में मांग बढ़ गई है। इस वक्त इसकी मांग प्रतिवर्ष 160 मिलियन टन से अधिक है। ऐसे में आशंका है कि उच्च स्तर के बॉक्साइट की दुनिया भर में कमी हो जाएगगी। चूंकि मांग अधिक है और आपूर्ति कम, इसलिए निम्न स्तरीय बॉक्साइट से आर्थिक रूप से वहनीय और पर्यावरण के अनुकूल एल्यूमीनियम के उत्पादन की प्रक्रिया व तकनीकें विकसित किए जाने की जरूरत है। निम्न स्तर के बॉक्साइट में सिलिका खनिज की मात्रा अधिक होती है, जिसे बॉक्साइट से अलग करना जरूरी है। इस परियोजना में ऑस्टे्रलिया, चीन और भारत उच्च सिलिका वाले बॉक्साइट के संसाधन में सुधार के लिए एक साथ काम कर रहे हैं। इसमें बॉक्साइट अवशेषों के पुनर्संसाधन से प्राप्त एल्यूमिना का उपयोग करके उसकी मात्रा बढ़ाना, संसाधन के लिए जरूरी रसायनों की प्रतिप्राप्ति और इस्तेमाल और व्यावसायिक एवं आर्थिक रूप से व्यावहारिक उत्पादों का उत्पादन शामिल है। ऑस्ट्रेलिया, चीन और भारत इस परियोजना में साझीदारी कर रहे हैं।
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फ्लूराइड उत्सर्जन (गैस या पॉटिक्यूलेट के रूप में) एल्यूमीनियम गलाने की प्रक्रिया की देन है। प्रगलन के लिए फ्लूराइड की जरूरत पड़ती है। ये उत्सर्जन प्रगलन क्षेत्र के लिए पर्यावरण के लिहाज से गंभीर चिंता की वजह हैं, क्योंकि स्थानीय वनस्पति एवं जीव-जंतुओं पर इनका खतरनाक प्रभाव पड़ सकता है। इस परियोजना में साझीदार देश फ्लूराइड उत्सर्जन को नियंत्रित करने या इनके दुष्प्रभावों को दूर करने के उद्देश्य से काम करेंगे। इसके लिए वे एल्यूमीनियम पिघलाने वालों को उनके फ्लूराइड उत्सर्जन के ऑपरेशन के बारे में सूचनाएं मुहैया कराएंगे, ताकि वे विश्व अनुपात के साथ तारतम्य बिठा सकें। यह परियोजना साझीदार देशों में एल्यूमीनियम पिघलाने से होने वाले उत्सर्जन को कम करने के उद्देश्य से श्रेष्ठ प्रयोगों और प्रौद्योगिकी नियेाजन की दिशा में काम कर रही है। ऑस्ट्रेलिया, चीन और भारत इस परियोजना में साझीदारी कर रहे हैं।
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एल्यूमीनियम का पुनर्प्रयोग प्राथमिक धातु उत्पादन के लिए जरूरी ऊर्जा का महज पांच प्रतिशत का ही उपयोग करता है और एल्यूमिना- संसाधन और एल्यूमीनियम के उत्पादन से जुड़े अन्य प्रदूषकों के साथ परफ्लूरोकार्बन के उत्सर्जन से भी दूर रखता है। इस परियोजना के पहले चरण में साझीदार देश एल्यूमीनियम पुनर्प्रयोग दर की बेसलाइन तय करेंगे, एल्यूमीनियम कैन पर अपना ध्यान केंद्रित करेंगे और प्रगति की समीक्षा के लिए सालाना रिपोर्ट का एक तंत्र तैयार करेंगे। यह परियोजना एल्यूमीनियम संग्रहण एवं पुनर्प्रयोग के श्रेष्ठ क्रियाकलापों का डाटाबेस विकसित करने की भी योजना बना रही है। इनमें सुरक्षा और पर्यावरण के क्षेत्र में हो रहे बेहतर प्रयोग शामिल हैं। ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत, जापान और अमेरिका इस परियोजना में साझीदारी कर रहे हैं।
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पर्यावरण और व्यावसायिक प्रदर्शनों में सुधार के लिए एल्यूमीनियम कार्यबल के तहत गतिविधियों का कार्यान्वयन नए और वर्तमान प्रौद्योगिकी के उपयोग पर निर्भर करता है। ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत और अमेरिका प्रौद्योगिकी प्रदाताओं का एक सार्वजनिक रजिस्टर बनाने की योजना बना रहे हैं, ताकि बदलावों को लागू करने के लिए जरूरी संसाधनों तक पहुंचना आसान हो। यह परियोजना साझीदारों को उद्योग और पर्यावरण विशेषज्ञों से संबंध बनाने का अधिकार देगी और एक प्रतिस्पर्धी बाजार तैयार करने के लिए प्रोत्साहित करेगी, ताकि अधिक पर्यावरण उपयोगी गतिविधियां शुरू की जा सकें। पहले चरण में, साझीदार देशों के राष्ट्रीय उद्योग परिसंघों और कार्यबल में सहयोगी सरकारों के लिए एक इंटरनेट रजिस्टर तैयार किया जायेगा। ऑस्ट्रेलिया, चीन, भारत और अमेरिका इस परियोजना में साझीदारी कर रहे हैं।
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परफ़्लूरोकार्बन (पीएफ़सी) का एक लम्बा वातावरणीय जीवनकाल होता है और भूमन्डलीय ताप बढ़ाने की इसकी क्षमता कार्बन डाई औक्साइड से कई हज़ार गुना अधिक होती है। पीएफ़सी उत्सर्जन पर क़ाबू पाना जलवायु परिवर्तन में कमी लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम है। मूल एल्यूमीनियम उत्पादन से पीएफ़सी उत्सर्जन होता है, लेकिन ऐसी प्रोद्योगिकी अपना कर उस उत्सर्जन को कम किया ज सकता है जो स्वतः एनोड प्रभावों का पता लगा ले । इस विधि से चीन में - जो कि विश्व के 32% मूल एल्यूमीनियम का उत्पादन करता है - पीएफ़सी उत्सर्जन में अनुमानतः 22 से 29 प्रतिशत या 1.1 से 2.1 मिलियम मेट्रिक टन कार्बन डाई औक्साइड के बराबर की कमी लाई जा सकती है । इस परियोजना के अन्तर्गत चीन में कई एल्यूमीनियम प्रगालकों में सुधार करके उन्हें हस्तचालित एनोड प्रभाव हनन के स्थान पर स्वचालित प्रभाव हनन वाला बनाया जाएगा, और साथ ही चीन के शेष प्रगालकों में परिवर्तन की गति बढ़ाने के लिए इस उद्योग के भीतर, शिक्षा संस्थानों में, तथा सरकार में क्षमता निर्माण होगा । अमरीका और चीन इस परियोजना में भाग लेने वाले साझेदार हैं।